खतरे में विधायकी: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अब्दुल्ला आजम

By Team MyNationFirst Published Dec 18, 2019, 6:27 AM IST
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असल में सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर के ज्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक अब्दुल्ला आजम खान की विधायक को रद्द करने फैसला किया किया था। हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई फैसला नहीं सुनाया। अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ बीएसपी उम्मीदवार नवाब काजिम अली खान ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कोर्ट में दलील दी थी कि अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द की जाए क्योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए गलत प्रमाण पत्रों का सहारा लिया है और उनका चुनाव शून्य घोषित किया था।

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आज़म खान के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दलील दी है कि 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उनकी उम्र कम नहीं थी। लिहाजा हाई कोर्ट के फैसले को खारिज किया जाए।

असल में सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर के ज्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक अब्दुल्ला आजम खान की विधायक को रद्द करने फैसला किया किया था। हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई फैसला नहीं सुनाया। अब्दुल्ला आजम खान के खिलाफ बीएसपी उम्मीदवार नवाब काजिम अली खान ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कोर्ट में दलील दी थी कि अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द की जाए क्योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए गलत प्रमाण पत्रों का सहारा लिया है और उनका चुनाव शून्य घोषित किया था।

काज़िम अली खान की याचिका पर उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अब्दुल्ला आज़म खान विधान सभा का चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं थे। क्योंकि जो तथ्य कोर्ट में पेश किए गए हैं उसके मुताबिक वह 2017 के विधानसभा चुनाव लड़ने के योग नहीं थी। जबकि अब्दुल्ला आजम खान ने नामांकन पत्र में अपनी उम्र को 25 साल बताया है। उच्च न्यायालय में अब्दुल्ला खान के खिलाफ अपनी चुनाव याचिका में काज़िम अली खान ने दावा किया था कि अब्दुल्ला आजम खान की वास्तविक जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 है जबकि नामांकन पत्रों में उन्होंने अपनी जन्मतिथि 30 सितंबर, 1990 बताई है।

गौरतलब है कि अब्दुल्ला खान समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। हालांकि काजिम अली खान ने कोर्ट में अब्दुल्ला खान के शैक्षिक प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और वीजा को प्रस्तुत किया था। जिसमें उनकी उम्र 1 जनवरी 1993 बताई गई है। अपने फैसले में कोर्ट ने चुनाव आयोग और उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष को आगे की कार्यवाही के लिए आदेश दिया है।
 

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