
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को उत्तर चौबीस परगना में नैहाटी नगरपालिका के सामने धरने पर बैठेंगी। बताया जा रहा है कि ममता अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के उन समर्थकों को सहारा देने के लिए धरने पर बैठेंगी जो चुनाव के दौरान हुई हिंसा से प्रभावित हुए थे।
लेकिन खास बात यह है कि नैहाटी नगरपालिका के पार्षद मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। वह उन 52 पार्षदों में से हैं, जिन्होंने तृणमूल छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया था।
दरअसल सड़क पर धरना देकर ममता बनर्जी अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही हैं। वह ये दिखाना चाहती हैं कि बंगाल की जनता की सबसे बड़ी हितैषी वही हैं।
इस धरने के लिए ममता बनर्जी ने नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने का अपना कार्यक्रम बदल दिया। ऐसा करते हुए ममता ने बहाना बनाया कि बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं के मारे जाने के बारे में झूठ बोल रही है। ममता ने बयान दिया है कि ‘बीजेपी झूठ प्रचारित कर रही है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा में बीजेपी के 54 कार्यकर्ताओं की मौत हुई है। ममता ने कहा कि ये पूरी तरह से झूठ है, बंगाल में राजनीतिक हत्याएं नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि ये मौतें निजी रंजिश, पारिवारिक झगड़े का परिणाम हो सकती हैं’।
दरअसल ममता बनर्जी अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि वह किसी भी सूरत में बीजेपी के साथ नहीं हैं।
लोकसभा चुनाव में अपनी कई सीटें गंवाने के बाद ममता बनर्जी के सामने अपनी पार्टी को टूट से बचाने की चुनौती आ गई है।
पिछले दिनों तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों औऱ 52 पार्षदों ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। उनके साथ सीपीआई-एम का भी एक विधायक बीजेपी में शामिल हुआ था।
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