
पुलवामा हमले के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुरक्षा बलों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। तीनों सेनाओं को और मजबूती देने के लिए रक्षा उपकरणों की खरीद की इमरजेंसी पावर दे दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, तीनों सेनाओं के लिए रक्षा खरीद संबंधी अधिकारों में इजाफा किया गया है। अब वे किसी भी प्रस्ताव के तहत 300 करोड़ रुपये की हथियार प्रणाली खरीद सकेंगे।
इसका एक अर्थ यह भी है कि पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सरहद पर तनाव की स्थिति को देखते हुए वे खुद से आधुनिक हथियारों की खऱीद कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, तीनों सेनाएं एक ही विक्रेता से भी हथियार और उपकरण खरीद सकते हैं। इसके लिए एकीकृत वित्तीय सलाहकार की सहमति की जरूरत नहीं होगी। जिस हथियार प्रणाली को खरीदने की अनुमति होगी उसे खरीदा जाएगा और प्रस्ताव के तीन महीने के अंदर तैनात कर दिया जाएगा।
इस प्रस्ताव के तहत सेना 246 स्पाइक एंटी टैंक गाइडेट मिसाइल (एटीजीएम) खरीदने की योजना बना रही है। यह दुश्मन की टैंक रेजीमेंट के खिलाफ काफी मारक साबित हो सकती है।
इसी तरहत, नेवी और एयरफोर्स भी मिसाइल और दूसरी हथियार प्रणाली खरीदने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है, ताकि पाकिस्तान के साथ किसी तरह की जंग की स्थिति से पहले ही पूरी तरह तैयार हुआ जा सके।
शुक्रवार को सेना के शीर्ष कमांडरों ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों की व्यापक समीक्षा की थी। इसमें चीन और पाकिस्तान से सटी सीमा के हालात का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान यह फैसला किया गया कि अपने संभावित प्रतिद्वंद्वियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना होगा।
सूत्रों के अनुसार, सैन्य कमांडरों ने बालाकोट हवाई हमले और पाकिस्तान द्वारा भारत पर जवाबी कार्रवाई की कोशिश को देखते हुए पाकिस्तान सीमा पर आपातकालीन सुरक्षा परिस्थितियों पर भी चर्चा की। 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हुए फिदायीन हमले के बाद से भारतीय सेना ने एलओसी पर आक्रामक रुख अपना रखा है।
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