
नई दिल्ली। महज एक प्याज ने केन्द्र सरकार से लेकर जनता को परेशान कर रखा है। देश में प्याज की कीमत नीचे नहीं आ रही है। जबकि थोक भाव में प्याज की कीमत कम हो रही है। लेकिन खुदरा भाव कम नहीं हो रहे हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में प्याज 100-120 किलोग्राम के बीच बिक रहा है। हालांकि केन्द्र सरकार का दावा है कि प्याज की कीमत जल्द कम होगी।
रिजर्व बैंक को भी प्याज ने परेशान करना शुरू कर दिया है। क्योंकि प्याज के कारण पिछले महीने के दौर महंगाई दर प्रभावित हुई है। हालांकि इस तिमाही में महंगाई दर पिछले दिन साल के सबसे उच्चतम स्तर पर है। लेकिन प्याज के कारण मंहगाई दर में सीधे उछाल आया है। असल में आरबीआई की बैठक में प्याज का मुद्दा छाया रहा। आरबीआई का कहना हैकि खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर से लगातार बढ़ रही है और अक्टूबर में भी इसमें तेजी देखी गयी। इसका सबसे बड़ा कारण कई हिस्सों में बेमौसम बारिश के कारण खरीफ फसल को नुकसान पहुंचना है। जिसके कारण देशभर में सब्जियों के भाव बढ़े हैं और इसके कारण खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है।
आरबीआई का कहना है कि प्रभावित मौसम के कारण मंडी में सब्जियों की आवक पर असर पड़ा है। आरबीआई ने साफतौर पर कहा कि प्याज एवं अन्य सब्जियों की कीमत बढ़ जाने कारण पिछले तीन महीनों के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ी है। हालांकि आरबीआई का मानना है कि अस्थायी हो सकती है। क्योंकि मंडी में नई फसल आने के बाद कीमतों में कमी देखने को मिलेगी। बैंक का ये भी कहना है कि इस बात का पता बाद में चलेगा कि पिछले दिनों टेलकॉम कंपनियों द्वारा दूरसंचार सेवाओं का शुल्क बढ़ाने के बाद खुदरा मुद्रास्फीति पर किस तरह का असर हुआ है।
गौरतलब है कि देश में प्याज की कीमत आसमान छू रही हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने तुर्की से प्याज का आयात कर रही है। लेकिन माना जा रहा है कि जनता को जनवरी के बाद ही प्याज की महंगी कीमतों से राहत मिलेगी।
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