
पूरी तरह से कंगाल हो चुके पाकिस्तान को कर्ज तो मिल गया है, लेकिन इस कर्ज के बदले पाकिस्तान में महंगाई का जो दौर शुरू होगा। उसके फिलहाल रूकने के आसार नहीं है। जिसके कारण वहां जनता में हाहाकार मचना तय माना जा रहा है। हालांकि भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलक करने के बाद वहां मंहगाई काफी बढ़ चुकी है।
असल में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आईएफएफ) पाकिस्तान को कर्ज देने पर राजी हो गया है। लेकिन इसके ऐवज में आईएफएफ ने पाकिस्तान पर कड़ी शर्तें लागू कर दी हैं। इस शर्त के मुताबिक पाकिस्तान सरकार को जनता को दिए जा रहे टैक्स छूट को वापस लेना होगा। जाहिर है कि टैक्स छूट को वापस लेने के बाद पाकिस्तान में रोजमर्जा की वस्तुओं की कीमतों में उछाल आएगा। हालांकि पाकिस्तान में पहले से ही मंहगाई का स्तर काफी बढ़ा हुआ है।
जिसके कारण वहां हाहाकार मचा हुआ है। वहां पर पेट्रोल डीजल, दूध, टमाटर,चाय समेत कई वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ रही हैं। जिसके कारण जनता में इमरान सरकार को लेकर काफी नाराजगी बढ़ने लगी है। असल में आईएफएफ पाकिस्तान को आठ अरब डॉलर का कर्ज देने को तैयार हो गया है। लेकिन इसके बदले में पाकिस्तान को जनता को दी जा रही 700 अरब रुपये की टैक्स छूट को वापस लेना होगा। इसके लिए आईएफएफ ने दो साल की समय सीमा तय की है।
आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2018 तक पाकिस्तान पर 99 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज था। यह कर्ज उसकी जीडीपी का 35.8 फीसदी था। जानकारी के मुताबिक आईएफएफ की शर्त लागू हो जाने के बाद पाकिस्तान सरकार को इस साल 350 अरब रुपये की टैक्स छूट को वापस लेना होगा। इसके कारण कई उत्पादों की कीमतों में जबरदस्त उछाल आएगा। हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि पाकिस्तान अगले साल से बिजली और गैस की कीमतों को बढ़ाने के लिए सहमत हो गया है।
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