पंजाब ले जाकर बच्चों का धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के सदस्यों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Siddhartha Rai |  
Published : Sep 09, 2018, 12:45 AM IST
पंजाब ले जाकर बच्चों का धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के सदस्यों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

सार

झारखंड के 34 आदिवासी बच्चों को तस्करी के माध्यम से पंजाब ले जाकर उनका इसाई धर्म में परिवर्तन कराया जाता था। माय नेशन के इस  खुलासे के बाद झारखंड पुलिस ने लिंचपिन और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया हैं।

झारखंड के 34 आदिवासी बच्चों को तस्करी के माध्यम से पंजाब ले जाकर उनका इसाई धर्म में परिवर्तन कराया जाता था। माय नेशन के इस  खुलासे के बाद झारखंड पुलिस ने लिंचपिन और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया हैं। माय नेशन ने खुलासा किया था कि झारखंड के आदिवासी जिलों से सैकड़ों नाबालिग बच्चों को तस्करी के माध्यम से पंजाब लाया गया और उन्हे ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तित कराया गया था। यह रैकेट 2006 से काम कर रहा था।

गिरफ्तार किए गए लोगों में से सत्येंद्र मूसा लुधियाना में परिकम मैरी क्रॉस चाइल्ड होम चलाता है, यह वही चाइल्ड होम है जहां पर चाईबासा से लाए गए बच्चों को रखा जाता है। पकड़ा गया दूसरा व्यक्ति जूनुल लोंगा चाईबासा का आदिवासी है जो धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन गया था। जूनुल लोंगा झारखंड से बच्चों को भगाकर लुधियाना ले जाता था। 

चाइबासा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) क्रांति कुमार ने माय नेशन को बताया कि, ‘’दोनों को झारखंड पुलिस की एक टीम ने लुधियाना से गिरफ्तार किया और उन्हे अदालत में पेश करने के लिए वापस झारखंड लेकर आई’’। उन्होंने बताया कि "दोनो को शनिवार को गिरफ्तार किया गया और उन्हे  चाइबासा की अदालत में पेश किया जिसके बाद अदालत ने दोनों को पुलिस रिमांड में भेज दिया हैं"

क्रांति कुमार ने माय नेशन को यह भी बताया कि, सभी 34 बच्चे 10 साल से कम उम्र के हैं, जबकि लगभग तीन से चार बच्चे 12 साल के हैं। उन्होंने कहा, "मूसा और लोंगा ने पुलिस की कार्रवाई के बाद 34 में से 30 बच्चों को  उनके माता-पिता के पास वापस भेज दिया" 
उन्होंने कहा कि, "पुलिस ने 20 बच्चों के घर जाकर इसकी जांच की। इनमें से 15 बच्चों के बयान भी लिए गए हैं जबकि 5 बच्चों के बयान अभी लेने बाकी हैं।"

बच्चों ने पुलिस को बताया कि, उन्हें जिस स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया था वहां उनसे ज्यादातर समय बाइबल पढ़ाया जाता था और उनसे प्रार्थना कराया जाता है।  कुमार ने कहा "बच्चों को बाइबल पढ़ने और पूरे दिन प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया जाता था।

बच्चों को तीन बड़े से हॉल में रखा गया था। वहां पर रहने वाले पुराने बच्चो खाना पकवाया जाता था। बच्चों को एक पब्लिक हाईस्कूल पढ़ने के लिए उनकी लंबाई के हिसाब से भर्ती कराया गया था"।


 

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