
नई दिल्ली। चक्रवातीय तूफान 'फानी' को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने का बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दाव उल्टा पड़ गया लगता है। ममता बनर्जी ने पीएम मोदी पर संघीय ढांचे का अपमान करने का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि पीएम मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्री को फोन करने के बजाय राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से बात की और तूफान के बारे में जानकारी ली। लेकिन ममता के इस दावे के उलट पीएमओ से जो जानकारी सामने आई है, वह ममता बनर्जी की कथित कहानी की पोल खोल रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी से बात करने की लगातार कोशिश की गई थी, लेकिन ममता ने जानबूझकर पीएम मोदी से संवाद नहीं किया।
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टीएमसी और ममता बनर्जी के आरोपों के बाद पीएमओ के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से शनिवार सुबह दो बार ममता बनर्जी से बात करने की कोशिश की गई थी। इसके लिए पीएम मोदी के स्टाफ ने मुख्यमंत्री के पास फोन भी किया था, लेकिन उन्हें यह बताया गया कि सीएम दौरे पर हैं और लौटते ही पीएम मोदी से बात करेंगी। इसी तरह दूसरी बार फोन करने पर भी मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह कहा कि सीएम वापस लौटने पर ही पीएम मोदी से बात कर पाएंगी।
दरअसल, टीएमसी ने शनिवार को आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने फानी चक्रवात के बाद के हालात जानने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को फोन किया, लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल के सीएम ममता बनर्जी से कोई बात नहीं की। पीएम ने संघीय ढांचे का अपमान करते हुए राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से बंगाल में फानी से हुए नुकसान की जानकारी ली।
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