राजस्थान में खुलने वाला है वह पत्र, जो पीएम मोदी ने 8 महीने पहले लिखा

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Sep 20, 2023, 03:33 PM ISTUpdated : Sep 20, 2023, 04:39 PM IST
राजस्थान में खुलने वाला है वह पत्र, जो पीएम मोदी ने 8 महीने पहले लिखा

सार

पीएम नरेन्द्र मोदी करीब 8 महीने पहले भगवान देवनारायण के 1111वे जन्मदिवस पर आयोजित एक प्रोग्राम में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में आए थे। उस दौरान पीएम मोदी ने भगवान को 1111 रुपये का चढ़ावा भी चढ़ाया था। फिर कुछ कागज में लिखा और लिफाफाबंद पाती दान पात्र में डाल दी थी।

जयपुर। पीएम नरेन्द्र मोदी करीब 8 महीने पहले भगवान देवनारायण के 1111वे जन्मदिवस पर आयोजित एक प्रोग्राम में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में आए थे। उस दौरान पीएम मोदी ने भगवान को 1111 रुपये का चढ़ावा भी चढ़ाया था। फिर कुछ कागज में लिखा और लिफाफाबंद पाती दान पात्र में डाल दी थी। बताया जा रहा है कि अब दानपात्र खुलने का समय आ गया है। ऐसे में पीएम मोदी ने दानपात्र में क्या लिखकर डाला था। वह भी निकलेगा और पढ़ा जाएगा।

हर साल भाद्रपद महीने की छठ को खुलता है दानपात्र

राजस्थान की स्थानीय भाषा में दान पात्र में डाले जाने वाले पत्र को पाती कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना पत्र पर लिखकर दानपात्र में डाल सकता है। पीएम मोदी ने भी उसी ​परम्परा के मुताबिक, अपनी पाती दानपात्र में डाली थी। स्थानीय लोगों के अनुसार हर साल भाद्रपद महीने की छठ को यह दानपात्र खुलता है। इस बार दानपात्र में से पीएम मोदी की पात्री भी निकलेगी और पढ़ी जा सकेगी।

क्या कहते हैं मंदिर के पुजारी?

मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस वर्ष मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी ज्यादा है। इसकी वजह से दानपात्र खोलने का कार्यक्रम एक—दो दिन बिलम्ब से शुरु हो सकता है। उधर, स्थानीय लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि पीएम मोदी ने अपनी पाती में क्या लिखकर दानपात्र में डाला था। हालांकि यह दानपात्र खुलने के बाद ही पता चल सकेगा।

क्या गुर्जर वोट बैंक साधने को था पीएम मोदी का दौरा?

वैसे, सियासी लोग पीएम नरेन्द्र मोदी के भगवान देवनारायण मंदिर के दौरे को राजनीतिक चश्मे से देखते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में विधानसभा की 75 ऐसी सीटे हैं, जहां गुर्जर जनसंख्या काफी तादाद में है। ऐसे में उनका वह दौरा पूरी तरह से गुर्जर वोट बैंक को भाजपा के खेमे की तरफ आकर्षि​त करने के लिए था। गुर्जर वोट के बगैर यहां विजयश्री मिलना मुश्किल होता है।

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