
मुंबई। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार के बाद अब कांग्रेस में पार्टी विधायक ने बगावत शुरू कर दी है। हालांकि कई विधायकों ने अपनी नाराजगी आलाकमान तक पहुंचा दी है। हालांकि माना जा रहा है कि पार्टी कुछ नेताओं की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें संगठन में जगह दे सकता है। वहीं कुछ विधायकों को आने वाले समय में निगमों में जगह दी जाएगी।
कांग्रेस के पुणे जिले के भोर विधानसभा क्षेत्र से विधायक संग्राम थोप्टे को उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिलने के कारण पार्टी से बगावत कर दी है। थोप्टे के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय पर प्रदर्शन कर विरोध जताया। थोप्टे के समर्थन में पुणे के कांग्रेस के सभी 20 पार्षदों ने इस्तीफा दिया है। हालांकि अभी तक थोप्टे ने इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन माना जा रहा है वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं। वहीं कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक कैबिनेट में जगह नहीं मिलने के कारण पार्टी से नाराज चल रहे हैं।
नाराज विधायकों में पृथ्वीराज चव्हाण, नसीम खान, प्रणीति शिंदे, अमीन पटले, रोहितदास पाटिल शामिल हैं। इन नेताओं ने अपनी नाराजगी केन्द्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दी है। हालांकि चाव्हाण के बारे में कहा जा रहा उन्हें दिल्ली में कोई अहम पद दिया जा सकता है। इन नेताओं का कहना है कि नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया और जोड़तोड़ कर कुछ विधायकों को कैबिनेट में जगह मिली है। जबकि वह पार्टी के वफादार विधायक हैं, उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। हालांकि पार्टी को ये अहसास पहले ही से था कि कैबिनेट विस्तार में पार्टी के भीतर नेताओं में नाराजगी हो सकती है।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की सरकार बनने के 32 दिन बाद पहला कैबिनेट विस्तार हुआ है और जिसमें 36 नए मंत्रियों ने शपथ ली है। जिसमें 26 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली है। कैबिनेट बंटवारे के फार्मूले के तहत एनसीपी के 14, कांग्रेस से 10 और शिवसेना से 9 विधायक मंत्री बने हैं। जबकि तीन अन्य विधायकों को उद्धव कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है।
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