
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार धर्मसंकट में है। एक तरह वह राज्य में कांग्रेस के साथ सरकार चल रही है। वहीं वह केन्द्र में कांग्रेस का विरोध कर ही। इसके साथ ही वह जहां कांग्रेस के साथ विपक्ष में बैठ रही है। वहीं वह नागरिकता बिल के मामले में भाजपा के साथ है।
शिवसेना का दो नावों में सवार होना उसके लिए घाटे का सौदा हो सकता है और इसका असर राज्य सरकार पर पड़ सकता है। क्योंकि कांग्रेस और विपक्ष दल संसद में नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रहे हैं। जबकि भाजपा किसी भी हाल में इस बिल को पारित कराना चाहती है। ताकि देश में अवैध रूप से रहे लोगों को बाहर किया जा सके। इस बिल का समर्थन शिवसेना कर रही है। संसद में इस बिल के पक्ष में भाजपा का साथ दे रही है। जिसके कारण शिवसेना और कांग्रेस के बीच मतभेद उभर सकते हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस राज्य में शिवसेना के साथ सरकार बनाने से संकोच कर रही थी। क्योंकि वैचारिक तौर पर कांग्रेस और शिवसेना दोनों अलग है। शिवसेना जहां हिंदुत्व की राजनीति करती है वहीं कांग्रेस सेकुलर राजनीति करती है। लेकिन एनसीपी के साथ ही कांग्रेस शिवसेना की अगुवाई में सरकार में शामिल हो गई। लेकिन अब कांग्रेस एक बार फिर उहापोह की स्थिति में है। क्योंकि शिवसेना के साथ ही वह राज्य में सरकार के साथ है जबकि संसद में शिवसेना नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन कर रही है।
जो भाजपा के लिए एक बड़ा मुद्दा है। शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने से पहले ही नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन कर रही। लिहाजा संसद में कांग्रेस के सामने इस बिल के समर्थन करने को लेकर ऊहापोह की स्थिति में है। हालांकि शिवसेना पहले ही कह चुकी है कि इस बिल का वह समर्थन करती है। जबकि कई विपक्ष दल कांग्रेस के साथ इसका विरोध कर रहे हैं। शिवसेना संसद में विपक्ष में बैठ रही है।
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