
नई दिल्ली। राजस्थान में सियासी संकट छाया हुआ और सबकी नजर आज सुबह साढ़े दस बजे होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर लगी है। क्योंकि इस बैठक से साफ हो जाएगा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बचेगी या फिर कांग्रेस के बागी नेता सचिन राज्य की नई सरकार पायलट बनेंगे। फिलहाल कांग्रेस सरकार बचाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। वहीं सचिन पायलट का दावा है उनके पास 30 विधायक हैं जबकि कांग्रेस 109 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है।
फिलहाल सचिन पायलट के बगावती तेवरों को देखते हुए लग रहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार शायद न बचे। क्योंकि अगर सचिन पायलट के पास 30 विधायक हैं तो सरकार गिर जाएगी। हालांकि अगले कुछ घंटों में राज्य में सियासी तस्वीर साफ हो सकती है। उधर सचिन पायलट के बारे में कहा जा रहा कि वह दिल्ली में हैं और अपने करीब दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिए भाजपा आलाकमान के संपर्क में है। हालांकि चर्चा ये भी है कि पायलट सीधे भाजपा में नहीं जाना चाहते हैं।
वह पार्टी बनाकर भाजपा से समर्थन लेना चाहते हैं। इस विकल्प पर भाजपा शायद राजी न हो। लेकिन अंदरखाने भाजपा और सचिन पायलट के बीच बातचीत चल रही है। लेकिन फिलहाल सबकी नजर साढ़े दस बजे होने वाले विधायकों की विधायकों पर लगी है। वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा कि सचिन पायलट गुट के विधायक दिल्ली के आसपास ठहरे हुए हैं और उन्होंने अपने फोन बंद किए हुए हैं।
क्या है विधानसभा का गणित
राज्य की 200 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 101 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी राज्य में 107 विधायक कांग्रेस के हैं जबकि 13 निर्दलीय विधायक गहलोत सरकार को समर्थने दे रहे हैं। वहीं राज्य में भाजपा के पास कुल 72 विधायक हैं। वहीं आरएलपी के 3 सदस्यों का समर्थन भाजपा को है। अगर सचिन पायलट खेमा 25-30 विधायकों को अपने पाले में करता है राज्य में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जाएगी।
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