
लोकसभा चुनाव खत्म होती ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को कैबिनेट से निकाल दिया है। राजभर की पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ राज्य में लोकसभा का चुनाव लड़ा था। जिसके कारण योगी आदित्यनाथ और बीजेपी उनसे नाराज चल रही थी। हालांकि राजभर का दावा है कि उन्होंने पहले ही योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है।
असल में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के सहयोगी हैं। राज्य में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सुभासपा के साथ चुनावी गठबंधन किया था और वह 4 सीटें जीतने में सफल भी रही। इसके कारण उन्हें राज्य में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। हालांकि राज्य में मंत्री बनने के साथ ही राजभर ने योगी सरकार और बीजेपी के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए थे।
हालांकि बीच में उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी उनसे मुलाकात कर नाराजगी दूर करने की कोशिश की थी। लेकिन इसके बावजूद राजभर बीजेपी से नाराज चल रहे थे। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें घोसी सीट देने का ऑफर दिया था। हालांकि बीजेपी की शर्त थी कि वह बीजेपी के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे।
लेकिन राजभर ने पूर्वांचल की 22 सीटों पर अपने रत्याशी खड़े कर दिए। पूर्वांचल की इस सीटों पर राजभर ने बीजेपी के खिलाफ प्रचार किया और अंतिम चरण में एसपी और बीएसपी गठबंधन को समर्थन दिया। आज योगी सरकार ने राज्यपाल को कैबिनेट से निकालने के लिए पत्र लिख दिया है। हालांकि ओम प्रकाश राजभर दावा है कि उन्होंने 13 अप्रैल को ही वह योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।
राजभर ने ये भी दावा किया कि पार्टी के महासचिव अरविंद राजभर ने लघु उद्योग विकास निगम और दूसरे नेता राना अजित सिंह ने बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इन दोनों नेताओं को राजभर के दबाव में इन पदों पर नियुक्त किया गया था।
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