अपने ही फैसले पर योगी सरकार ने लिया यू-टर्न, जानें क्या है मामला

Published : Oct 16, 2019, 07:54 AM IST
अपने ही फैसले पर योगी सरकार ने लिया यू-टर्न, जानें क्या है मामला

सार

राज्य सरकार ने सोमवार को ही फैसला किया था कि राज्य में 25 हजार होमगार्ड को नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा। क्योंकि राज्य सरकार के पास बजट नहीं है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार पर होमगार्ड का बढ़ा हुआ वेतन देने के लिए पैसले नहीं है। लिहाजा इन होमगार्ड की सेवाओं का खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि अभी तक पुलिस विभाग होमगार्ड की सेवाएं ले रहा है। क्योंकि पुलिस विभाग में कर्मचारियों की कमी है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अब अपना ही फैसला बदल दिया है। राज्य सरकार ने राज्य के 25 हजार होमगार्ड की सेवाओं को खत्म करने का फैसला किया था। लेकिन चौतरफा विरोध और आलोचना के बाद योगी सरकार बैकफुट पर आ गई है। अब राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी होमगार्ड को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।

राज्य सरकार ने सोमवार को ही फैसला किया था कि राज्य में 25 हजार होमगार्ड को नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा। क्योंकि राज्य सरकार के पास बजट नहीं है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार पर होमगार्ड का बढ़ा हुआ वेतन देने के लिए पैसले नहीं है। लिहाजा इन होमगार्ड की सेवाओं का खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि अभी तक पुलिस विभाग होमगार्ड की सेवाएं ले रहा है। क्योंकि पुलिस विभाग में कर्मचारियों की कमी है।

लेकिन होमगार्ड पुलिस की तरह वेतन और भत्ते की मांग कर रहे थे। जिसको लेकर राज्य सरकार ने होमगार्ड के पद को ही खत्म करने का फैसला किया। जैसे ही राज्य सरकार ने ये फैसला किया। उसकी चारो तरफ से आलोचना होने लगी है और अब राज्य सरकार ने यूटर्न लेते हुए अपने फैसले पर रोक लगाई है।  राज्य के सैनिक कल्याण और होमगार्ड्स मंत्री चेतन चौहान ने कहा है कि किसी भी होमगार्ड की किसी भी परिस्थिति में नौकरी नहीं जाएगी।  हालांकि इसके लिए चौहान ने ट्वीट किया है।

चौहान ने लिखा है कि 'उत्तर प्रदेश के किसी भी होमगार्ड जवान को नहीं निकाला जाएगा, निकृष्टतम परिस्थितियों में भी नहीं।'असल में योगी सरकार का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह होमगार्ड को नए भत्ते देने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि इस आदेश के तहत भत्ता 500 रुपये से बढ़कर 672 रुपये हो गया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार पर हर महीने दस से 12 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लिहाजा राज्य सरकार ने ये फैसला किया। राज्य सरकार के फैसले का विरोध राजनैतिक दलों के साथ सोशल मीडिया में भी होने लगा।

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