कैसे पाकिस्तान से आया एक साधारण लड़का बना भारत का होटल टायकून? ओबेरॉय ग्रुप की अनसुनी कहानी
First Published Mar 24, 2025, 10:30 AM IST
Mohan Singh Oberoi Success Story: पाकिस्तान के झेलम में जन्मे मोहन सिंह ओबेरॉय ने संघर्ष और मेहनत से भारत में ओबेरॉय होटल्स का विशाल साम्राज्य खड़ा किया। जानिए कैसे ₹50 की सैलरी से शुरू करके उन्होंने ₹25,000 करोड़ की लग्जरी होटल चेन बनाई!
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Mohan Singh Oberoi: क्या बिना बैंक बैलेंस और विरासत की दौलत के कोई बड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है? अगर आप सोचते हैं कि नहीं, तो मोहन सिंह ओबेरॉय की कहानी आपकी सोच बदल देगी। 50 रुपये की मामूली सैलरी से शुरुआत करने वाले मोहन सिंह ओबेरॉय ने आज 25,000 करोड़ रुपये की ओबेरॉय होटल चेन खड़ी कर दी है, जो 7 देशों में फैली हुई है।
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₹50 की सैलरी से 25,000 करोड़ का साम्राज्य
क्या कोई व्यक्ति मात्र ₹50 की सैलरी से शुरू करके 25,000 करोड़ रुपये का होटल साम्राज्य खड़ा कर सकता है? अगर आपको लगता है कि ऐसा नामुमकिन है, तो आपको मोहन सिंह ओबेरॉय की कहानी जरूर जाननी चाहिए। यह कहानी सिर्फ एक बिजनेसमैन की नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल है। एक समय था जब पाकिस्तान के झेलम जिले में जन्मे एक साधारण युवक को अपने परिवार का पेट भरने के लिए जूता फैक्ट्री में काम करना पड़ा। लेकिन आज उनका नाम दुनिया के सबसे बड़े होटल कारोबारियों में लिया जाता है।

कौन थे मोहन सिंह ओबेरॉय?
झेलम, पाकिस्तान में जन्मे मोहन सिंह ओबेरॉय का जीवन आसान नहीं था। बचपन में ही पिता का निधन हो गया, और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई। संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने अपने चाचा की जूता फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी। हालांकि, जब भारत-पाकिस्तान विभाजन हुआ, तो दंगों के चलते उन्हें अपना घर-बार छोड़कर शिमला आना पड़ा। यह सफर मुश्किलों से भरा था, लेकिन यही वह मोड़ था जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

₹50 की सैलरी वाली नौकरी से होटल इंडस्ट्री में पहला कदम
शिमला में उन्हें सेसिल होटल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिली, जहां उनकी सैलरी मात्र ₹50 प्रति माह थी। मेहनत, लगन और स्मार्टनेस के चलते जल्द ही उन्हें होटल के हिसाब-किताब का काम सौंप दिया गया।
1. होटल के हर छोटे-बड़े काम में रुचि ली।
2. एक्स्ट्रा वर्क करके खुद को साबित किया।
3. जल्द ही होटल के हिसाब-किताब की जिम्मेदारी भी संभाल ली।
उनकी मेहनत से प्रभावित होकर होटल के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें एक और होटल का प्रबंधन सौंप दिया। यहीं से उनकी असली यात्रा शुरू हुई।
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पत्नी के गहने बेचकर खरीदा पहला होटल
कुछ सालों बाद, होटल के अंग्रेज मैनेजर ने एक छोटा होटल खरीदा और ओबेरॉय को इसका प्रबंधन सौंप दिया। यही उनकी जिंदगी बदलने का मोड़ था। मोहन सिंह ओबेरॉय ने खुद को होटल इंडस्ट्री में स्थापित करने के लिए बड़ा कदम उठाया।
1. पत्नी के गहने बेचकर और अपनी सेविंग से 1934 में ‘The Clarkes Hotel’ खरीदा।
2. इस होटल को मुनाफे में बदल दिया और इससे मिली कमाई को फिर से बिजनेस में लगाया।
3. कोलकाता में 500 कमरों का होटल खरीदा, जिससे उनका कारोबार और तेजी से बढ़ने लगा।
अब वह केवल एक होटल मालिक नहीं, बल्कि भारत में लग्जरी होटल इंडस्ट्री के किंग बन रहे थे।

धीरे-धीरे खड़ा किया होटल इंडस्ट्री का साम्राज्य
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1943 – भारत की सबसे बड़ी होटल चेन पर कब्जा
1. एसोसिएटेड होटल्स ऑफ इंडिया (AHI) के शेयरों में निवेश किया।
2. इस ग्रुप के पास दिल्ली, लाहौर, मुर्री, रावलपिंडी और पेशावर में कई होटल थे।
3. जल्द ही उन्होंने AHI पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया और देश के सबसे बड़े होटल चेन के मालिक बन गए। -
आज, ओबेरॉय होटल्स 7 देशों में फैले हुए हैं, जिनमें भारत, चीन, यूएई, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

कैसे बने भारत के सबसे बड़े होटल टायकून?
1965 – दिल्ली में ‘The Oberoi Intercontinental’ की शुरुआत
1. यह होटल दिल्ली का पहला लग्जरी होटल बना।
2. इसने भारत में फाइव-स्टार होटल इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
1973 – मुंबई में 35-मंजिला ‘Oberoi Sheraton’ का निर्माण
1. यह होटल देश का सबसे ऊंचा और भव्य होटल था।
2. इसने ओबेरॉय ग्रुप को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई।

आज कहां खड़ा है ओबेरॉय ग्रुप?
आज ओबेरॉय ग्रुप सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
1. 7 देशों में लग्जरी होटल्स और रिसॉर्ट्स
2. EIH लिमिटेड और EIH एसोसिएटेड होटल्स लिमिटेड – 2 लिस्टेड कंपनियां
3. मार्केट कैप ₹25,000 करोड़ से ज्यादा
4. लग्जरी होटल इंडस्ट्री में भारत का अग्रणी ब्रांड

मोहन सिंह ओबेरॉय को मिले सम्मान और क्या मिलती है सीख?
1. भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
2. 2002 में 103 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।
3. आज उनके बेटे और ग्रैंडसन इस साम्राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
4. बड़ी शुरुआत के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती।
5. संघर्ष और मेहनत ही सफलता की असली कुंजी होती है।
6. हर मुश्किल अवसर को अवसर में बदलना ही एक विजेता की पहचान होती है।
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