बुलन्दशहर। हर साल UPSC  की परीक्षा में हजारों स्टूडेंट्स भाग लेते हैं। कोई पहले ही अटेम्प्ट में क्वालीफाई कर लेता है, तो किसी को लंबा समय लग जाता है। कोई बहुत अमीर घराने का होता है, कोई मीडियम फैमिली का होता है और कोई इतने गरीब घर का होता है कि उसके घर की छप्पर भी प्लास्टिक की होती है। ऐसे ही एक एस्पायरेंट (UPSC Aspirant ) है पवन कुमार, पवन सिंह राणा  के पिता किसान हैं। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी मुहैया हो पाती है।  लेकिन आज  बेटा IAS Officer  बन गया है तो घर के हालात सुधरने की उम्मीद है। माय नेशन हिंदी से पवन ने अपनी UPSC जर्नी शेयर की।

कौन है पवन
पवन सिंह राणा बुलंदशहर के ऊंचा गांव विकासखंड क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता मुकेश कुमार किसान है। मां सुमन हाउसवाइफ है। पवन की 3 बहने और एक भाई हैं। सबसे बड़ी बहन गोल्डी ने ग्रेजुएशन के बाद एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना  शुरू कर दिया।  दूसरी बहन सृष्टि ग्रेजुएशन कर रही है। सबसे छोटी बहन सोनिया ट्वेल्थ क्लास में पढ़ रही है। पवन ने नवोदय स्कूल  से इंटरमीडिएट किया उसके बाद इलाहाबाद से ग्रेजुएशन किया। पवन ने बताया ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली के कोचिंग सेंटर में सिविल सर्विसेज (Civil Service)  की तैयारी शुरू कर दी।




तीसरी अटेम्प्ट में मिली सफलता मिली पवन को 
पवन ने अपने रूम पर रहकर सेल्फ स्टडी किया। हालांकि जब दो बार UPSC  क्वालीफाई नहीं कर पाए तो निराशा और हताशा ने उन्हें घेरा  लेकिन फिर उन्होंने खुद को तैयार किया और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल किया। पवन ने बताया कि उनके घर का खर्चा खेती किसानी से ही चलता है और उनके पिता के पास सिर्फ चार बीघा जमीन है जिससे उन्होंने अपने सभी बच्चों को पढ़ाया। बुलंदशहर में पवन एक झोपड़ी में रहते हैं जिसका छप्पर भी पालीथिन का ही है।  उनका पूरा मकान कच्चा है।

स्ट्रेटजी चेंज करने का हुआ फायदा
पवन कहते हैं कि जब उन्हें दो बार कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने वेबसाइट पर ख़बरें पढ़ना शुरू किया। तीसरा अटेम्प्ट में सेल्फ स्टडी काम आई और उन्होंने यूट्यूब और ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए UPSC की तैयारी की। दो बार के झटके  के बाद पवन को उम्मीद नहीं थी की तीसरी बार उनका नाम आएगा लेकिन जब उन्होंने अपना नाम देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पवन को UPSC  में 239 में रैंक मिली।



बरसात में टपकता है पवन के घर में पानी 
अपने घर की स्थिति बताते हुए पवन कहते हैं कि कच्चे घर मे बरसात में पानी टपकता है। किताबें अक्सर भीग जाती थीं लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी मां-बाप ने अपने बेटे को हिम्मत नहीं हारने दिया।  अपनी सफलता का श्रेय पवन अपने माता-पिता और भाई बह  को देते हैं।   पवन की मां ने बात करते हुए कहा कि वह अपने बेटे की सफलता पर बहुत खुश है। पवन की बहन ने माय नेशन हिंदी पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि मैं कितना खुश हूं यह बता नहीं सकती।

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