सीबीआई बनाम सीबीआई: सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, सीवीसी की दलील, असाधारण स्थितियों के लिए असाधारण उपाय जरूरी

First Published 6, Dec 2018, 6:43 PM IST
CBI vs CBI: Supreme Court reserves verdict on Alok Verma's plea
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सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी में चल रही जांच को अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए। उनके वकील ने अस्थाना को व्हिसलब्लोअर बताया।

सीबीआई के डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई तक फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले, सभी पक्षों ने कोर्ट में अपने-अपने तर्क रखे। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने कहा कि कभी कभार पैदा होने वाली असाधारण स्थिति के लिए असाधारण उपाय करना जरूरी है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि ऐसी क्या परिस्थितियां हो गई थी कि डायरेक्टर को छुट्टी पर भेज दिया गया। वहीं कोर्ट में स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी में चल रही जांच को अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट में आज प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पीठ के समक्ष सीवीसी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने यह दलील दी। उन्होंने कहा कि (सीबीआई पर) आयोग की निगरानी के दायरे में इससे जुड़ी आश्चर्यजनक और असाधारण परिस्थितियां भी आती हैं। इस पर पीठ ने कहा कि सरकार की कार्रवाई के पीछे की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि सीबीआई निदेशक और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच झगड़ा रातों रात तो सामने नहीं आया। जिसकी वजह से सरकार को चयन समिति से परामर्श के बगैर ही निदेशक के अधिकार वापस लेने को विवश होना पड़ा हो।

इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने सीवीसी से यह भी पूछा कि किस वजह से उन्हें यह कार्रवाई करनी पड़ी, क्योंकि यह सब रातोंरात नहीं हुआ। तो मेहता ने कहा कि सीबीआई के शीर्ष अधिकारी मामलों की जांच करने के बजाय एक दूसरे के खिलाफ मामलों की तफ्तीश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीबीआई निदेशक के खिलाफ जांच के लिए मामला उसके पास भेजा था। सीवीसी ने जांच शुरू की लेकिन वर्मा ने महीनों तक दस्तावेज ही नहीं दिए। 

पीठ के सामने राकेश अस्थाना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से कहा कि इस मामले में वह तो व्हिसल-ब्लोअर थे, परंतु सरकार ने उनके साथ भी एक समान व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्मा के खिलाफ सीवीसी को जांच को अंतिम नतीजे तक ले जाना चाहिए। हालांकि आलोक वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन ने कहा कि केंद्र के आदेश ने उनके सारे अधिकार ले लिए। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से अधिकार वापस लेने और उन्हें छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले के खिलाफ उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट  में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने कहा कि अटार्नी जनरल ने उन्हें बताया है कि इस स्थिति के पीछे के हालात जुलाई में बने। कोर्ट ने कहा कि सरकार की कार्रवाई की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए।

वहीं बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि आखिर क्यों उन्हें सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और विशेष डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच सार्वजनिक लड़ाई के चलते बीच में उतरना पड़ा। साथ ही, दोनों को छुट्टी पर भेजने पर मजबूर होना पड़ा। पीठ ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राकेश अस्थाना का पक्ष भी सुना। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन दोनों के बीच लड़ाई तेज होने पर सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर वर्मा को निदेशक के अधिकारों से वंचित करते हुए अवकाश पर भेज दिया था।
 

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