क्रिश्चियन मिशेल का प्रत्यर्पणः मिलिए 'ऑपरेशन यूनिकॉर्न' की सफलता के नायकों से

First Published 5, Dec 2018, 8:08 PM IST
Christen Michel extradition: Meet Operation unicorn's Hero's
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इंटरपोल के नोटिस के बाद फरवरी 2017 में यूएई के अधिकारियों ने क्रिश्चियन मिशेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही भारतीय अधिकारी उसे लाने की कोशिश में जुटे थे। सीबीआई के साथ-साथ ईडी और अन्य एजेंसियां लंबे समय से दुबई सरकार के संपर्क में थीं। 

वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले का मुख्य बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल इस समय सीबीआई की कस्टडी में है। सरकार उसे दुबई से प्रत्यर्पित कराकर लाई है। मिशेल के प्रत्यर्पण को भारतीय एजेंसियों और कूटनीतिक कोशिशों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि मिशेल का प्रत्यर्पण जितना अप्रत्याशित है, उसे भारत लाने के मिशन 'ऑपरेशन यूनिकॉर्न' की कहानी भी उतनी ही रोमांचक है।

इंटरपोल के नोटिस के बाद फरवरी 2017 में यूएई के अधिकारियों ने क्रिश्चियन मिशेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही भारतीय अधिकारी उसे लाने की कोशिश में जुटे थे। सीबीआई के साथ-साथ ईडी और अन्य एजेंसियां लंबे समय से दुबई सरकार के संपर्क में थीं। हालांकि मिशेल को भारत लाना आसान नहीं था। दुबई प्रशासन में अच्छी पैठ होने के साथ-साथ मिशेल के शाही परिवार के साथ बेहतर संबंध थे। लिहाजा कई लॉबिंग करने वाले ये नहीं चाहते थे कि मिशेल को भारत भेजा जाए। लेकिन लगातार कूटनीतिक कोशिशों के बाद दुबई प्रशासन पर दबाव बनाने में सफलता मिली और मिशेल को भारत लाया जा सका। उसे स्पेशल प्लेन से मंगलवार रात 10.35 बजे दिल्ली लाया गया। 'माय नेशन' आपको मिला रहा है इस हाई प्रोफाइल केस की अहम कड़ी के प्रत्यर्पण को मुमकिन बनाने वाले अहम किरदारों और उनके द्वारा किए गए काम से। 

अजित डोवल, एनएसए 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस मामले में बड़ी भूमिका निभाई। डोवल इस मामले को लंबे समय से देख रहे थे और पिछले 18 महीने से वह लगातार दुबई के अधिकारियों के संपर्क में थे। डोवल ने सुरक्षा मामलों को लेकर संबंधों को आगे बढ़ाते हुए भारत के वांटेड अपराधियों को दुबई से भारत लाने में सफलता हासिल की है। भारत की एजेंसियां डोवल के मार्गदर्शन में ही कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही मिशेल की गतिविधियों को ट्रैक कर रही थी। ये कहना गलत न होगा की डोवल ने यूएई सरकार को मिशेल को भारत भेजने के लिए अपने भरोसे में लिया। इससे पहले भी डोवल कई बड़े मिशन को अंजाम दे चुके हैं। राफेल के मुद्दे पर भाजपा को घेर रही कांग्रेस के लिए मिशेल अब गले की हड्डी बन गया है। 

सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दुबई की सत्ता में बैठे लोगों से बातचीत की और सभी गुप्तचर और जांच एजेंसियां मिशेल को दुबई एयरपोर्ट तक लाईं। सुषमा ने एक दिन पहले ही दुबई में यूएई और भारत की 12वीं संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया था। ताकि इस मामले को अंजाम तक पहुंचाया जा सके। भारतीय राजदूत नवदीप सूरी ने भी मिशेल को भारत प्रत्यार्पित कराने में कड़ी मेहनत की।  

अनिल धस्माना, रॉ चीफ

देश की खुफिया एजेंसी के मुखिया अनिल धस्माना भी मिशेल को भारत लाने वाली टीम का हिस्सा हैं। एजेंसी मिशेल को गल्फस्ट्रीम एयरक्राफ्ट से दुबई से भारत लाई। धस्माना की एक टीम अरसे से दुबई में डेरा डाले हुए थी ताकि इस मामले में किसी भी तरह की अड़चन न आए। अपने 23 महीने के कार्यकाल में धस्माना ने वहां की सुरक्षा एजेंसियों के साथ मजबूत रिश्ते बनाए। ताकि इस तरह के अपराधियों को भारत वापस लाने में आसानी हो।

नागेश्वर राव, अंतरिम सीबीआई चीफ

सीबीआई के कार्यवाहक प्रमुख नागेश्वर राव ने भी मिशेल को भारत लाने के लिए अहम भूमिका निभाई। कुछ दिनों पहले ही उन्हें सीबीआई के अंतरिम निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है। राव अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर केस में कई बार दुबई सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत करने के लिए वहां जा चुके थे। राव लगातार सुषमा स्वराज के साथ संपर्क बनाए हुए थे ताकि किसी भी मुद्दे पर आसानी से निपटा जा सके। अब राव इस मामले में इस बिचौलिये के खिलाफ मजबूत केस बनाने की तैयारी में हैं। ताकि कोर्ट में इस मामले पर किसी भी कानूनी प्रक्रिया से निपटा जा सके।

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