क्या पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता मनमोहन सिंह को बचा रहे हैं?

First Published 5, Dec 2018, 6:48 PM IST
How UPA era coal secretary took it in the neck to save Congress netas skin
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दिल्ली कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में कोयले के ब्लॉक को आवंटित करने के लिए नियमों का पालन न करने के जुर्म में पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके इलावा दो अन्य लोगों को चार साल की सजा सुनाई गई है। इन सबके बीच सवाल यह है कि क्या गुप्ता तत्कालीन कोयला मंत्री और पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को मामले से बचाने के लिए खुद की कुर्बानी दे रहे हैं?

गुप्ता को न केवल तीन साल की सजा सुनाई गई है, बल्कि भ्रष्टाचार करने के जुर्म में 50000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जो कि अब साबित हुआ है। मंत्रालय के सेवानिवृत्त निदेशक के.सी. समरिया को भी सजा सुनाई गई है और जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा एचसी गुप्ता के उपर भी जुर्माना लगाया गया है। उनके अलावा  धातु और बिजली विकास लिमिटेड के प्रमोटर पटनानी भी इस घोटाले में दोषी पाए गए हैं। जिसने कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में यूपीए 2 की राजनीतिक व्यवस्था को फिर से हिलाकर रख दिया। वह और उसके सहयोगी आनंद मलिक दोनों घोटाले में शामिल होने के कारण जेल में 4 साल के लिए रहेंगे। 

गंभीर मुद्दे का तर्क देते हुए जिसमें 1 लाख 86 हजार रुपये का खर्च शामिल है, सीबीआई ने पांच दोषी व्यक्तियों के लिए अधिकतम सात साल की कारावास की मांग की थी और शामिल निजी कंपनियों पर असामान्य रूप से भारी जुर्माना लगाया था।

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में विकास धातुओं और बिजली लिमिटेड (वीएमपीएल) को मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला ब्लॉक आवंटित करते समय अनियमितताओं से संबंधित है। सीबीआई ने सितंबर 2012 को पूरा मामला दर्ज किया था। गुप्ता 31 दिसंबर 2005 से लेकर नवंबर 2008 तक कोयला सचिव थे।

अब इस मामले में दिलचस्पी जैसा क्या है? गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर थे। जिसमें धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश शामिल थी, लेकिन उसके बाद भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था। अब मामला यह है कि क्या वे पूर्व प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह को बचा रहे थे, जिन्हें अक्सर श्री क्लीन कहा जाता है? 

कोयला मंत्रालय उनके अधीन होने के बाद भी मनमोहन सिंह अपनी नाक के नीचे इस तरह के विशाल घोटाले की भनक तक नहीं ले पाए। जांचकर्ता गुप्ता को अपने अंडर में रखना चाहते थे, क्योंकि वही वह प्रमुख व्यक्ति हैं जिसका प्रयोग वे लोग कोयला मंत्री के खिलाफ गवाह के रूप में कर सकते हैं, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने इस मामले में लड़ने का फैसला किया और पूर्व प्रधानमंत्री उर्फ श्रीमान क्लीन एक पारदर्शी प्रशासक की छवि बनाए रखने में कामयाब रहे। 

गुप्ता के जेल जाने वाले फैसले को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं और अगर यह फैसला सही है तो ऐसा क्यों?

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