चौटाला परिवार की जंग, अब अजय चौटाला कूद पड़े हैं 'रण' में

First Published 8, Nov 2018, 4:28 PM IST
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हरियाणा में मुख्य विपक्षी पार्टी आईएनएलडी के लिए क्या जींद बनेगा तख्तापलट का गवाह? क्या जीन्द में 17 को दोहराया जा सकता है यूपी वाला इतिहास? जानिए अजय चौटाला द्वारा प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाए जाने के मायने...

चरखी दादरी से प्रदीप साहू  के इनपुट के साथ

नई दिल्ली- इंडियन नेशनल लोकदल का अंदरूनी कलह सतह पर है और यह नित नए मोड़ ले रही है। ओमप्रकाश चौटाला और बड़े भाई अजय चौटाला की गैरहाजिरी में पूरी तरह से पार्टी को संभाल रहे अभय चौटाला का वर्चस्व पार्टी पर है और इसके नतीजे सामने भी आ चुके हैं। पार्टी से उनके दोनों भतीजों दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को निकाला जा चुका है। आरोप उनपर अनुशासनहीनता का है। निष्कासन का फैसला पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला के हवाले से लिया गया। 

पैरोल पर बाहर आए और जनसंपर्क करहे इनेलो महासचिव अजय सिंह चौटाला का मिजाज और इशारा यह बता रहा है कि 17 नवम्बर की तारीख इनेलो के लिए निर्णायक साबित होने जा रही है। अजय चौटाला ने 17 नवम्बर को जींद में पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाई गई है। जिसमें निर्णायक फैसला लिया जाएगा। अजय चौटाला के प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाने के बयान पर अब सियासी गलियारों में इनेलो पार्टी को लेकर भी संशय हो गया है।अजय चौटाला ने ये भी कहा कि इनेलो किसी व्यक्ति विशेष की पार्टी नहीं बल्कि जनता की ओर इशारा करते हुए, इन लोगों की पार्टी है किसी की बपौती नहीं। 


चौटाला परिवार में चल रही वर्चस्व की जंग के बीच 17 तारीख की प्रदेश कार्यकारिणी की यह बैठक तख्तापलट का इशारा देती लग रही है। सांसद बेटे दुष्यंत चौटाला और इनसो प्रमुख दिग्विजय चौटाला को पार्टी से बाहर निकाले जाने से बेहद खफा चल रहे अजय चौटाला हरियाणा में यूपी का सियासी इतिहास दोहराते हुए नजर आ रहे हैं। 

जिस तरह उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव का तख्ता पलट कर दिया था, उसी तरह हरियाणा में दुष्यंत चौटाला अपने चाचा अभय चौटाला की बिसात को बिखेरने की दिशा में आगे बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं। 

अजय चौटाला 6 नवंबर से पूरे प्रदेश के दौरे पर निकले हैं और 17 नवम्बर को जींद में निर्णायक फैसला करने का ऐलान कर गए हैं। ऐसे में सबकी निगाहें 17 को जीन्द के फैसले पर टिक गई हैं। 

अगर अजय चौटाला के दावों में दम रहा तो 17 नवम्बर को जींद में इनेलो में अभय चौटाला की बजाय पार्टी पर अजय चौटाला के परिवार का दबदबा होता हुआ नजर आएगा। अजय चौटाला पार्टी वर्करों के दमखम और कैडर में मौजूद अपने शुभचिंतकों के बलबूते पर बाजी अपने परिवार के नाम पर करने के अभियान पर निकल चुके हैं। 

दीवापली से एक दिन पहले चरखी-दादरी में अजय चौटाला की जनसभा के बाद इनसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला मीडिया से बात करते हुए कहा कि 17 नवम्बर को जींद में साबित कर देंगे कि इनेलो पार्टी के साथ कौन जुड़ा है। कांग्रेस के पेड वर्कर की बात पर कहा कि जनता हमारे साथ है। जिन लोगों ने अपनी चार पीढियां पार्टी के नाम कर दी, उनको कांग्रेसी कहना क्या औचित्य है। कांग्रेस उन लोगों को मुबारक हो, जो भूपेंद्र हुड्डा के साथ थाली में खाना खाते हैं। कांग्रेस व भाजपा से हमे कोई लेना-देना नहीं। इनेलो पार्टी हमारी है और हम पार्टी के हैं। लोगों को पार्टी से निकालने पर काम नहीं चलेगा। जो लोग रणजीत चौटाला जैसा हर्ष होने की बात करते हैं वो पार्टी को तोडऩे वाले लोग हैं। हमने सिर्फ पार्टी को जोडऩे के लिए कार्य किया है।

दिग्विजय चौटाला ने इस फोटो का दिया है हवाला 

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बता दें, कि नवंबर के शुरुआती दिनों में ही इनेलो में लंबे समय से चली आ रही चाचा अभय चौटाला और भतीजों दुष्यंत व दिग्विजय की जंग में भतीजों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने 2 नवंबर को तुरंत प्रभाव से सांसद दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को इनेलो से निकालने का फरमान जारी कर दिया था। दुष्यंत को पार्लियामेंट में पार्टी की संसदीय समिति के नेतृत्व से भी हटा दिया गया।

दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय सिंह दोनों पर ही 7 अक्तूबर, 2018 को सोनीपत के गोहाना में आयोजित चौधरी देवी लाल की जयंती उत्सव के दौरान अनुशासनहीनता, हुड़दंग और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष फैलाने वाली नारेबाजी के आरोप लगे थे। 

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