प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम की चर्चा जोरों पर चल रही हैं। कांग्रेस इसके जरिए वाराणसी के साथ ही पूर्वोचल के जिलों में माहौल बना रही है। हालांकि अभी ये कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, लेकिन ‘गांधी परिवार’ इसके लिए गुणा भाग करने में जुटा है।

असल में अभी तक कांग्रेस वाराणसी के लिए प्रत्याशी नहीं तय नहीं कर पायी है। या यूं कहें कि कांग्रेस को ऐसा कोई प्रत्याशी नहीं मिल पाया है जो पीएम नरेन्द्र मोदी को टक्कर दे सके। अगर देखें तो वाराणसी में लड़ाई अभी तक एक तरफा मानी जा रही है। राज्य में एसपी और बीएसपी गठबंधन होने के बावजूद अभी तक कोई प्रत्याशी नहीं उतारा गया है। लिहाजा अब कांग्रेस में प्रियंका को उतारने की खबरें तेजी से चल रही हैं। पिछले दिनों प्रियंका ने वाराणसी के साथ ही पूर्वोंचल के कुछ जिलों में जाकर मंदिरों के दर्शन कर इसे हवा दे दी थी कि वह चुनाव लड़ सकती हैं।

हालांकि उस मीडिया के सवालों पर उल्टा सवाल दागते हुए प्रियंका ने कहा था कि क्या मुझे वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहिए। हालांकि उस वक्त ये एक मजाक हो सकता था, लेकिन अब ये तय हो गया है कि वर्तमान समय में कांग्रेस इस दिशा में सोच रही है। असल में प्रिंयका को उतार कर पार्टी एक तीर से दो निशाने साध रही है। पहली कि प्रियंका को वाराणसी से उतारे जाने के बाद पूर्वोंचल के जिलों में भी इसका असर पड़ेगा, जैसा 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने के बाद हुआ था। और अगर प्रियंका यहां से चुनाव भी हारी तो कांग्रेस को जनता को बताने में आसानी होगी कि प्रियंका मोदी जैसे बड़े नेता से हारी और अगर हार का अंतर कम होता है तो वह बीजेपी को अगले चुनावों में घेरेगी और उसकी नैतिक हार बताएगी।

हालांकि कांग्रेस के नेता ये भी मान रहे हैं कि प्रियंका के वाराणसी से उतरने के बाद रायबरेली और अमेठी में प्रियंका का फोकस कम हो जाएगा। जानकार मान रहे हैं कि पूर्वी यूपी खासकर इलाहाबाद के बाद का माहौल बदलेगा। इसके साथ ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बड़ेगा। बहरहाल प्रियंका के इस राजनैतिक भविष्य का फैसला गांधी परिवार को लेना है। हालांकि प्रियंका चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं जबकि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने इस पर रजामंदी नहीं दी है। वहीं कांग्रेस के एक सूत्र का कहना है कि प्रियंका के चुनाव लड़ने के बाद यूपी में असर पड़ेगा और वह हार भी जाती हैं तो अमेठी सीट जीतने के बाद ये सीट प्रियंका गांधी को दी जा सकती है। कांग्रेस के नेता प्रियंका के लिए अपने तर्क दे रहे हैं।

नेताओं का कहना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में में पीएम मोदी ने वाराणसी से लगभग पौने चार लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। जबकि सभी विपक्षी दल अलग-अलग लड़े थे। लिहाजा अगर सभी विपक्षी दलों से समर्थन मांगा जाए तो मोदी को हराना मुश्किल नहीं है और उन्हें हराने के नाम पर परोक्ष तौर पर एसपी और बीएसपी समर्थन दे सकती हैं।