मानहानि मामले में विवेक डोभाल के समर्थन में दो गवाहों के बयान दर्ज

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First Published 11, Feb 2019, 6:47 PM IST
Two witnesses record statement in support of Vivek Doval in defamation case against Caravan
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विवेक डोभाल के मित्र निखिल कपूर और कारोबारी सहयोगी अमित शर्मा ने इस आपराधिक मानहानिकारक याचिका के समर्थन में अपने बयान दर्ज कराए।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल द्वारा ‘कारवां’ पत्रिका और कांग्रेस नेता जयराम रमेश के खिलाफ दायर की गई मानहानि याचिका के समर्थन में दो गवाहों ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। विवेक डोभाल ने ‘कारवां’ में कथित मानहानिकारक लेख प्रकाशित किए जाने और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश द्वारा इस सामग्री का इस्तेमाल किए जाने को लेकर यह याचिका दायर की है।

डोभाल के मित्र निखिल कपूर और कारोबारी सहयोगी अमित शर्मा ने इस आपराधिक मानहानिकारक याचिका के समर्थन में अपने बयान दर्ज कराए।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने मामले में अगली सुनवाई के लिये 22 फरवरी की तारीख तय की है। डोभाल ने 30 जनवरी को अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था और कहा था कि पत्रिका द्वारा लगाये गये सभी आरोप ‘आधारहीन’ और ‘फर्जी’ हैं। इन आरोपों के कारण उनके परिजनों और पेशेवेर सहकर्मियों की नजर में उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 17 जनवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में इन आरोपों को दोहराया था। शर्मा ने अपने बयान में कहा कि लेख प्रकाशित होने के बाद निवेशकों में बहुत बेचैनी है। उन्होंने कहा कि निवेशक इस बात पर अड़े हुए हैं कि विवेक इस्तीफा दें क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के चलते उन्हें ‘लगातार निशाना’ बनाया जाता रहेगा।

शर्मा ने लेख में छपे उन आरोपों को खारिज किया कि विवेक का कारोबार उनके बड़े भाई शौर्य डोभाल के कारोबार से जुड़ा है। शर्मा ने कहा, ‘विवेक के भाई शौर्य खुद का निवेश कारोबार चलाते हैं, लेकिन हमारी कंपनियों के बीच कोई वित्तीय हित नहीं जुड़े हैं। कारवां का वह बयान कि विवेक डोभाल के विदेशी उपक्रमों का उनके बड़े भाई शौर्य डोभाल के एशिया में संचालित कारोबारों से अस्पष्ट संबंध हैं, यह सरासर गलत और दुर्भावनापूर्ण है।’ 

उन्होंने कहा, ‘लेख प्रकाशित होने के बाद कई संभावित निवेशक या तो पीछे हट गए हैं या उन्होंने फंड में निवेश करने में अनिच्छा जताई है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं यह ध्यान दिलाना चाहूंगा कि पश्चिमी देशों में धनशोधन बहुत बड़ा अपराध है। इस तरह की प्रकृति के आरोप चाहे वह सच हों या नहीं, लेकिन उनसे अपूर्णीय क्षति होती है। अवैध गतिविधियों में संलिप्तता की किसी भी छवि के भयंकर दुष्परिणाम होते हैं।’ 

शर्मा ने कहा, ‘लेख में हालांकि मेरे नाम का जिक्र नहीं है और मेरे खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं लेकिन इससे मेरी भी मानहानि हुई है।’ पुणे के कारोबारी और विवेक के सहपाठी रहे कपूर ने अपने बयान में कहा कि यह लेख ‘कॉपी पेस्ट’ है और जो भी प्रकाशित किया गया है उनमें कोई दम नहीं है।

कपूर ने कहा, ‘बिना किसी शक-शुबहे के विवेक, लेख में प्रकाशित ऐसी किसी भी चीज में संलिप्त नहीं हैं।’ विवेक ने अपनी शिकायत में कहा कि पत्रिका और रमेश ने ‘उनके पिता से दुश्मनी निकालने के लिए जानबूझ कर मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने के इरादे से मानहानि’ का प्रयास किया।

‘कारवां’ ने 16 जनवरी को ऑनलाइन प्रकाशित अपने लेख ‘द डी कंपनीज’ में लिखा था कि ‘‘विवेक डोभाल केमैन आइलैंड्स में हेज फंड चलाते हैं’ जो कर चोरी का स्थापित टैक्स हेवेन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 2016 में सभी मौजूदा 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित करने के महज 13 दिन बाद इसका पंजीकरण कराया गया था।

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