पहले अटेम्प्ट में नहीं निकला प्रीलिम्स, खास स्ट्रेटजी बनाकर अनमोलम ने 2nd अटेम्प्ट में क्रैक कर लिया UPSC 2020

By Team MyNationFirst Published Dec 13, 2021, 4:50 PM IST
Highlights

देवघर, झारखंड के रहने वाले अनमोलम के पिता दीनबंधु व मां निर्मला देवी पेशे से शिक्षक हैं। उनको देश के तीन अहम संवर्गों में से एक में काम करने का मौका मिलेगा। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा डीएवी देवघर से हुई। Asianetnews Hindi संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) में सिलेक्ट हुए 100 कैंडिडेट्स की सक्सेज जर्नी (Success Journey) पर एक सीरीज चला रहा है।

करियर डेस्क. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में देश भर के लाखों युवा अपना भाग्य आजमाते हैं। उस अनुपात में भारतीय प्रशासनिक सेवा में रिक्तियों की संख्या सीमित है। जिन मेहनती एस्पिरेंटस का चयन नहीं होता है, यह उन पर सदमे सा असर करती है। अक्सर प्रीलिम्स या मेंस परीक्षा के बाद न चयनित हो सके स्टूडेंड के सुसाइड की खबरें आती हैं। यूपीएससी 2020 में 103वीं रैंक हासिल करने वाले अनमोलम ऐसी घटनाओं पर दुख जताते हुए कहते हैं कि यूपीएससी का सम्मान करना चाहिए। पर इसको बहुत ज्यादा ग्लैमराइज नहीं करना चाहिए। इससे समाज में एक अगल कल्चर क्रिएट हो रहा है। हमें अन्य सेक्टर पर भी फोकस करना चाहिए। उन्हें सम्मान देना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) के नतीजे 24 सितंबर, 2021 को जारी किए गए। फाइनल रिजल्ट (Final Result) में कुल 761 कैंडिडेट्स को चुना गया। Asianetnews Hindi संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) में सिलेक्ट हुए 100 कैंडिडेट्स की सक्सेज जर्नी (Success Journey) पर एक सीरीज चला रहा है। इसी कड़ी में हमने अनमोलम से बातचीत की। आइए जानते हैं उनकी सक्सेज जर्नी। 

दूसरे अटेम्पट में मिली सफलता, सिविल सर्विस में नहीं आते तो टीचिंग में करियर बनाते
देवघर, झारखंड के रहने वाले अनमोलम के पिता दीनबंधु व मां निर्मला देवी पेशे से शिक्षक हैं। उनको देश के तीन अहम संवर्गों में से एक में काम करने का मौका मिलेगा। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा डीएवी देवघर से हुई। उन्होंने वर्ष 2008 में डीएवी देवघर से 10वीं तक पढ़ाई की और डीपीएस रांची से वर्ष 2010 में 12वीं उत्तीर्ण किया। इसके बाद CLAT उत्तीर्ण कर चाणक्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएलएनयू) पटना से बीए.एलएलबी किया। बैच में उनका सेकेंड रैंक था। यह वर्ष 2015 में फाइनल हुआ था। फिर साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, दिल्ली से इंटरनेशनल लॉ में वर्ष 2017 में एलएलएम किया। उसके बाद अनमोलम यूपीएससी तैयारी में जुट गए। वर्ष 2019 के पहले अटेम्पट में प्रीलिम्स क्वालिफाई नहीं हुआ था। यह उनका दूसरा अटेम्पट था। उनका कहना है यदि वह सिविल सर्विस में नहीं आते तो टीचिंग में करियर बनाते।

यूपीएससी में मेहनत और भाग्य दोनों का अहम किरदार
अनमोलम का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा में मेहनत और भाग्य दोनों का अहम रोल होता है। ये पूरी प्रक्रिया आपको बहुत कुछ सिखाती है। यह परीक्षा न सिर्फ आपके नॉलेज बल्कि आपके धैर्य को भी टेस्ट करती है। हार्डवर्क का कोई विकल्प नहीं है। यह जर्नी आपको एक बेहतर इंसान बनने में काफी मदद करती है, क्योंकि आप इतनी सारी चीजों को पढ़ते हैं। दिल से पढ़ते हैं, समझ के पढ़ते हैं। आप इवाल्व खूब करते हैं। यदि आपका हो जाए तो अंजाम बेहतर होता है। पर इसका सफर बहुत बढ़िया होता है। वर्ष 2017 के अंत में उन्हें जॉब के अवसर भी मिले थे। अच्छी सैलरी मिल रही थी। उस समय अनमोलम को चुनाव करना था कि उन्हें एकेडमिक क्षेत्र में जाना हैं या फिर प्रशासनिक सेवा के लिए तैयारी करनी है। पर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के लिए तैयारी की ही राह चुनी।

पहले अटेम्पट में असफलता खुद की गलती से
अनमोलम कहते हैं कि पहले अटेम्पट में वह असफल हुए तो उसमें उनकी खुद की गलती थी। प्रीलिम्स में उनका सीसैट सही नहीं हुआ था। वहां पर तैयारी में गलती थी। जीएस में अच्छे नम्बर आए थे। इस असफलता की वजह मेरा एकेडमिक अहंकार था, क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि सीसैट वगैरह तो ऐसे ही हो जाएगा। पर किसी भी पेपर को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस बार की परीक्षा में भी अच्छे अच्छे कैंडिडेट हैं। जिनका सीसैट नहीं हुआ। समस्या यह है कि लोग विश्वास नहीं करते हैं। पर जो आप पर विश्वास नहीं करते हैं, उनसे चिंतित नहीं होना है। खुद के अंदर विश्वास होना चाहिए। आपके आस पास जो सकारात्मक लोग हैं, वह रहने चाहिए। उनका कहना है कि वह परीक्षा को लेकर उतने आत्मविश्वास में नहीं थे। जितने उनके फैमिली  और फ्रेंड थे।

ये चीजें एस्पिरेंटस पर अनावश्यक रूप से क्रिएट करती हैं प्रेशर
अनमोलम का कहना है कि एक एस्पिरेंटस यह फील करता है कि यह कोई इतनी भारी चीज है कि यूपीएससी निकालने के लिए आप में कुछ सुपर नेचुरल पोटेंशियल होना चाहिए। यह सही नहीं है। इस परीक्षा में एम्स से एमबीबीएस व एमडी करने वाले, हार्वर्ड, आईआईटी, आईआईएम अहमदाबाद, एनएलयू बेंगलुरू के भी बच्चे हैं तो इग्नू के भी बच्चे हैं। सभी इंस्टीटयूशन के बच्चे हैं। उनका रिप्रेजेंटेशन है। इसे सामान्य रखा जाए। इसके एराउंड जो पम्प एंड शो क्रिएट किया जाता है। इसकी बहुत कीमत चुकानी पड़ती है। यह एस्पिरेंटस को भी अनावश्यक रूप से प्रेशर में डालता है। समाज के लिए भी अच्छा नहीं है। इस एवेन्यू को टैलेंट को आकर्षित करना चाहिए। पर हमें टैलेंटेड लोगों की अन्य क्षेत्रों में भी आवश्यकता है ना कि सिर्फ सिविल सर्विस में।

अच्छा काम है तो वह ज्यादा समाजिक है, निजी कम
अनमोलम का कहना है कि सफलता को बाइनरी में मत देखिए। जब सफलता और असफलता जैसी कोई चीज है तो वह सामाजिक होती है। व्यक्तिगत बहुत कम हेाती है। जब कोई व्यक्ति कुछ अच्छा कर पाता है तो वह समाज की सफलता है। जब कोई व्यक्ति कोई असमाजिक काम करता है तो वह समाज का पतन है। जैसे ही आप किसी को सफल बोल रहे हैं तो आप बहुत बड़े तबके को असफल बोल रहे हैं। यह अपने में बहुत ही ज्यादा एक्सक्लूजनरी (अपवर्जनात्मक) है। इससे बहुत ज्यादा इत्तेफाक नहीं रखता हूं। लेकिन अगर कुछ अच्छा काम है, तो वह ज्यादा समाजिक है, निजी कम है। वह कहते हैं कि यह समाज ही सफल और असफल होता है। उन्हें जीवन में अच्छी फैमिली , परिवार, पैरेंटस, टीचर्स और दोस्त मिले। अनमोलम अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, दोस्त व टीचर्स को देते हैं। उनका कहना है कि कई बार वह लोग भी होते हैं, जो पर्दे के पीछे होते हैं।

इंटरव्यू में प्रीटेंड नहीं कर सकते

अनमोलम कहते हैं कि इंटरव्यू को टफ नहीं कहूंगा, क्योंकि मेरा अनुभव अच्छा था। इंटरव्यू में इंटरएक्शन का लेबल बहुत अच्छा था। वहां मॉक इंटरव्यू जैसा माहौल नहीं होता है। वह पहले आपको कम्फर्टेबल महसूस कराते हैं। बहुत ही इंटरेस्टिंग और अच्छा अनुभव होता है। इंटरव्यू के एक दिन पहले मेरे क्लोज फैमिली  और फ्रेंड कॉल कर रहे थे कि इंटरव्यू अच्छा ही देना है। मेरा दिमाग शांत था। यह तो पता नहीं था कि वह क्या पूछेंगे। यह तय किया था कि अच्छे से बोलना है। नेचुरली खुद को प्रेजेंट करना है। दिमाग यह सेटल कर चुका था कि प्रीटेंड नहीं कर सकता। मैं जो हूं वह दिखा दूंगा। उनका इंटरव्यू करीबन 35 से 40 मिनट तक चला था।

फिजूल की चीजों में मत पड़ें, न करें ओवरथिंक
अनमोलम कहते हैं कि एस्पिरेंटस बेसिक पर फोकस करें, एनसीईआरटी कि किताबें पढ़ें। न्यूज पेपर रोज पढ़ें। अपने आपको अनुशासित करें। यह तैयारी अनुशासन की तैयारी है। मोटिवेटेड रहें, स्मार्टली हार्डवर्क करें। ज्यादा डायवर्जन मत रखें। फिजूल की चीजों में ज्यादा मत पड़ें। ज्यादा ओवरथिंक मत करें। परीक्षा की तैयारी ईमानदारी से करेंगे तो सफलता मिलेगी। इससे आपके व्यक्तित्व का विकास होगा। फाइनली मेरिट लिस्ट में नाम आने या नहीं आने में भाग्य का भी बड़ा किरदार है। पर यदि आप अच्छे से तैयारी करते हैं तो आप ऐसे ही सफल हैं। इससे आपकी पर्सनालिटी बैलेंस हो जाएगी, जो एक सिटीजन के लिए जरूरी है। सोर्सेज सीमित रखें।

पूर्वाग्रह से ग्रसित न हों
अनमोलम का कहना है कि युवा अपना काम ईमानदारी से करें। संविधान के मूल्य में यकीन करें। संविधान के मूल्य सर्वोपरि हैं। आप जाति, धर्म या क्षेत्र के जो भेद हैं। उस भेद की वजह से आप पूर्वाग्रह से ग्रसित न हों। संविधान में आस्था रखें। उसके हिसाब से अपना व्यक्त्त्वि बनाएं। सोशल मीडिया पर समय बर्बाद मत करें, उसका प्रोडक्टिव यूज करें। यदि आप अच्छे स्कालर, प्रोफेसर या गवर्नमेंट की एजेंसी को फालो कर रहे हैं, तो उनसे आप यह मदद लें कि वह किस तरह आपकी तैयारी में सहायक की भूमिका अदा कर सकते हैं। पर यदि आप सोशल मीडिया पर समय नुकसान करते हैं, तो वह ठीक नहीं है।

आसपास के सकारात्मक लोग हमेशा करते थे मोटिवेट
परिवार, दोस्त और अध्यापक सिविल सर्विस को लेकर अनमोलम को शुरू से ही मोटिवेट करते रहें कि प्रशासनिक सेवा में अनपैरलल डायवर्सिटी है। यहां पर आपको काम करने का जो अवसर मिलता है, वह बहुत डायवर्स है। इस फील्ड में यदि आप अच्छा काम करते हैं तो आप समाज में बहुत ज्यादा योगदान दे सकते हैं। उनके आस पास के सकारात्मक लोग उन्हें हमेशा सिविल सर्विस परीक्षा देने के लिए मोटिवेट करते थे। इससे भी उनका प्रशासनिक सेवा की तरफ रूझान बढ़ा।

यूपीएससी को बहुत ज्यादा ग्लैमराइज करने से अन्य सेक्टर पर फोकस हो रहा कम
अनमोलम सुझाव पेश करते हुए कहते हैं कि यूपीएससी का सम्मान करना चाहिए। इसमें मेहनत है। पर इसको बहुत ज्यादा ग्लैमराइज नहीं करना चाहिए। इससे समाज में एक अलग कल्चर क्रिएट हो रहा है कि बाकि लोग जो समाज में बहुत अच्छा योगदान दे रहे हैं। जैसे- डाक्टर, टीचर, इंजीनियर, सांइटिस्ट आदि उन पर फोकस कम होता जा रहा है। सोसाइटी के रूप में हमें उस पर भी ध्यान देना चाहिए।

यूपीएससी परीक्षा जीवन से ज्यादा अहम नहीं
अनमोलम ने दुख जताते हुए कहा कि अभी एक खबर आयी कि एक बच्चे ने प्रीलिम्स का रिजल्ट आने के बाद सुसाइइ कर लिया। उनका कहना है कि यदि यूपीएससी की परीक्षा जान से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गयी तो बहुत दिक्कत वाली बात है। एस्पिरेंटस के लिए मेंटल हेल्थ बहुत ही महत्वपूर्ण है। आप मानसिक तौर पर भी मजबूत रहें कि कोई भी परीक्षा आपके जीवन से ज्यादा अहम नहीं है। आपका खुश रहना बहुत अहम है। खुश रहिए और ईमानदारी से मेहनत करिए।

सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर भी हैं सफल
उनका कहना है कि यदि आप यूपीएससी में सिलेक्ट होते हैं तो आप बहुत अच्छा देश के लिए कर सकते हैं यदि नहीं भी होते हैं तो आप दूसरी जगह बहुत अच्छा कर सकते हैं। यह नहीं कि हम यूपीएससी परीक्षा को जीवन से ज्यादा अहम मान लें और कोई गलत कदम उठाए। हमारे देश को अच्छे लीडर, इंडस्ट्रियलिस्ट, स्पोर्टसमैन की जरूरत है। सचिन तेंदुलकर, एआर रहमान, लता मंगेशकर, मुकेश अंबानी, रतन टाटा भी सफल हैं। अन्य सेक्टर में भी अच्छा किया जा सकता है। इसलिए आप परीक्षा को ही जीवन-मरण समझकर डिप्रेशन में न जाए। बहुत से बच्चे नशे का शिकार हो रहे हैं। खुद को लूजर नहीं माने। आपके पास जीवन में योगदान देने के लिए बहुत कुछ है। जान है तो जहान है।

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