केरला में Chickenpox मरीजों की डराने वाली संख्या आई सामने, 9 लोगों की मौत, गंभीर लक्षणों को न करें इग्नोर

Bhawana tripathi |  
Published : Mar 18, 2024, 03:15 PM IST
केरला में Chickenpox मरीजों की डराने वाली संख्या आई सामने, 9 लोगों की मौत, गंभीर लक्षणों को न करें इग्नोर

सार

Chickenpox patients in Kerala: केरला में तेजी से  chickenpox मामले बढ़ रहे हैं। अब तक इस वायरल इंफेक्शन के कारण 6 हजार से ज्यादा लोग पीड़ित हो चुके हैं वहीं 9 लोग जान गवां चुके हैं। 

Chickenpox outbreak kerala: केरला से डराने वाली खबर सामने आ रही है। केरला में चिकनपॉक्स के 6000 केस समाने आए हैं। वायल इंफेक्शन से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। बच्चों को प्रभावित करने वाला ये इंफेक्शन बड़ों को भी अपना शिकार बना सकता है। पिछले साल इस राज्म में चिकनपॉक्स के करीब 26,000 केस सामने आये थे। चिकनपॉक्स होने पर शरीर में विभन्न प्रकार के लक्षण दिखते हैं। साथ ही वीक इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर चिकनपॉक्स वायरस तेजी से हमला करता है। आइए जानते हैं चिकनपॉक्स के लक्षण और बचाव के तरीके। 

चिकनपॉक्स (Chickenpox) क्यों होता है?

चिकनपॉक्स वायरस (वैरिसेला-जोस्टर वायरस) से फैलने वाला संक्रमण है। इस संक्रमण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में देखने को मिलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या फिर संक्रमित व्यक्ति का सामान इस्तेमाल करने से बीमारी फैलती है। शरीर में पड़ने वाले फफोले से निकलने वाला तरल पदार्थ अगर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के संपर्क में आता है तो वो भी चिकनपॉक्स से संक्रमित हो जाता है। वैक्सिनेशन या टीकाकरण न होने पर ये लोगों को तेजी से संक्रमित करता है। 

चिकनपॉक्स के लक्षण

वायरल संक्रमण चिकनपॉक्स का असर संक्रमित होने के करीब 10 से 15 दिन में दिखने लगता है। चिकनपॉक्स होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं।

  • बुखार आना
  • शरीर में छोटे-छोटे दाने पड़ना
  • भूख न लगना
  • दानों में फफोले और तरल पदार्थ भरना
  • पूरे शरीर में तेजी से खुजली होना
  • मांसपेशियों में दर्द होना

चिकनपॉक्स के लक्षण 10 दिनों तक दिख सकते हैं। धीरे-धीरे ये कम होने लगते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में लक्षण गंभीर दिख सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। 

चिकनपॉक्स से बचाव के लिए वैक्सिनेशन है जरूरी

चिकनपॉक्स से बचने के लिए बच्चों का 12 से 15 महीने की उम्र में वैक्सिनेशन किया जाता है। डॉक्टर से जानकारी लेने के बाद बच्चे को बू्स्टर डोज जरूर दिलाना चाहिए। साथ ही जिन लोगों को संक्रमण हो, उनसे दूरी बनाकर रखना चाहिए। 

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