
नेशनल डेस्क। अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। अदालत ने SEBI की जांच में दखल देने से इंकार कर दिया है। तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सेबी की जांच में आदेश नहीं दिया जा सकता। सेबी के अधिकार क्षेत्र में दखल करने के लिए अदालत के पास शक्ति सीमित है। ऐसे में जांच को सेबी से SIT को जांच ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं है
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई थीं याचिकाएं
सर्वोच्च न्यायालय में अडानी ग्रुप के खिलाफ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में मांग की गई थी की अडानी केस की जांच SIT या किसी अन्य एजेंसी से कराई जाए। इस मामले में डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंज ने सुनवाई की। वहीं अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 24 नवबंर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद कोर्ट ने बुधवार को आदेश सुनाया।
बचे हुए केस की जांच के निर्देश
इससे इतर सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को अडानी-हिंडनबर्ग मामले में तीन महीने के अंदर पेंडिंग पड़े 2 मामलों की जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार और सेबी से नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी की सिारिस पर विचार करने के लिए कहा है।
क्या थी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ?
गौरतलब है, बीते साल हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गौतम अडानी ग्रुप ने शेयरों के पैसों में हेराफेरी की है। रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई हालांकि इसे अडानी ग्रुप ने खारिज कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गौतम अडानी ने ट्वीट करते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पता लगता है कि सत्य की जीत हुई है। मैं उन लोगों का आभारी हूं जो हमारे साथ खड़े रहे।
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