कांग्रेस के ऑपरेशन 'हाथी' से मायावती को लगा बड़ा झटका

By Team MyNationFirst Published Sep 17, 2019, 7:15 AM IST
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पिछले दिनों ही बसपा विधायक ने ये कहकर सबको चौंका दिया था कि बसपा में पैसे लेकर टिकट बांटे जाते हैं और जो जितना पैसा देता है। उसका टिकट तय माना जाता है। कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों में राजेन्द्र गुढा, जोगेंद्र सिंह अवाना, वाजिब अली, लाखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद खेरिया हैं। 

जयपुर। कांग्रेस ने एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी को झटका दिया है। राज्य में कांग्रेस ने बसपा के छह विधायकों को तोड़ लिया है और अब इस तरह में अशोक गहलोत सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है। इससे पहले भी कांग्रेस बसपा विधायकों को तोड़ चुकी है। छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब राज्य विधानसभा में बसपा का कोई भी विधायक नहीं है।

भाजपा के ऑपरेशन लोटस की तर्ज पर ही राजस्थान में कांग्रेस ने भी ऑपरेशन हाथी चला कर सरकार को समर्थन दे रही बहुजन समाज पार्टी के छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया है। राज्य में बसपा के छह विधायक थे और ये अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। अभी तक बसपा के सभी विधायक राज्य की कांग्रेस सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे।

अगर ये कहा जाए राज्य में बसपा का विलय कांग्रेस में हो गया है तो गलत नहीं होगा। बसपा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों का कहना है कि क्षेत्र में विकास के लिए वो कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए हैं। विधायकों का कहना है कि हम लोगों के लिए दुविधा थी। क्योंकि एक तरफ हम सरकार को समर्थन दे रहे थे और वहीं क्षेत्र में उनके खिलाफ लड़ रहे थे।

फिलहाल बसपा ने विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस में शामिल होने का पत्र भी सौंप दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही बसपा विधायक ने ये कहकर सबको चौंका दिया था कि बसपा में पैसे लेकर टिकट बांटे जाते हैं और जो जितना पैसा देता है। उसका टिकट तय माना जाता है। कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों में राजेन्द्र गुढा, जोगेंद्र सिंह अवाना, वाजिब अली, लाखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद खेरिया हैं। 

राज्य में बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद राज्य की अशोक गहलोत सरकार और अधिक मजबूत और स्थिर हो गई है। राज्य में 200 विधायकों में कांग्रेस के 100 विधायक थे लेकिन अब कांग्रेस के 106 विधायक हो गए हैं। वहीं सरकार को 13 निर्दलीय विधायकों में से 12 विधायक बाहर से समर्थन दे रहे हैं।

लिहाजा अब गहलोत सरकार को निर्दलीय विधायकों के समर्थन की भी जरूरत नहीं है। हालांकि इससे पहले अशोक गहलोत 2009 में भी बसपा के सभी छह विधायकों को तोड़ चुकी है और उस वक्त सरकार बचाने के लिए कांग्रेस को पांच विधायकों की जरूरत थी।

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