नई दिल्ली। अगर आप जानवरों को पालने के शौकिन हैं और अपने इस शौक के पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो आपके लिए दूसरे भी विकल्प हैं मौजूद। आप चिड़िया घर में जानकारों को गोद ले सकते हैं। यही नहीं आप शेर और हाथी को भी गोद ले सकते हैं। असल में देश में फैले कोरोना संक्रमण के कारण चिड़ियाघर बंद हैं और इसके कारण इन आय भी बंद हो गई है। जिसके कारण जानवरों को खिलाने के लिए इन के पास धन की कम हो रही है। लिहाजा अब चिड़ियाघरों में इस तरह की योजना शुरू की गई है।

देश में कोरोना का संकट शुरू होने के बाद से, चिड़ियाघरों सहित कई सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया गया। लेकिन इस दौरान जानवरों की देखभाल करना और आय के मुख्य स्रोत बंद हो गए थे। जिसके कारण चिड़ियाघरों में आर्थिक संकट मंडराने लगा। लिहाजा जानकारों की जरूरत के मुताबिक धन की व्यवस्था भी करनी थी। लेकिन इसके लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने नया रास्ता अपनाया और जानवरों को गोद लेने की पहल की।  हालांकि देश के कई चिड़ियाघरों में ये योजना पहले से ही चल रही है। लेकिन वन्य जीवों के प्रति लगाव रखने वाले पसंदीदा जानवर को अपनाकर उन्हें पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक नंदनकानन चिड़ियाघर अपने खर्चों को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष लगभग 15 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करता है, लेकिन लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण वह पैसा इकट्ठा करने में विफल रहा। फिलहाल 4 अक्टूबर से चिड़ियाघर फिर शुरू हो गया है। लेकिन अब चिड़ियाघर प्रशासन ने जानवरों की देखभाल के लिए आवश्यक धन इकट्ठा करने के लिए नंदनकानन चिड़ियाघर और देश भर के कुछ अन्य चिड़ियाघरों ने ऑनलाइन पशु गोद लेने की शुरुआत की है। गोद लेने के लिए लिए जाने वाले भुगतान का पैसा उस जानवर के भोजन, सौंदर्य और चिकित्सा खर्चों की ओर जाएगा।

फिलहाल नंदनकानन में शेर और बाघ से लेकर पक्षियों और सांपों की विभिन्न प्रजातियों तक के कई जानवर गोद लिया जा सकता है। वहीं इसके साथ ही विशाखापत्तनम में कंबालाकोंडा रिजर्व फॉरेस्ट में स्थित चिड़ियाघर में जानवरों को गोद लेने की प्रक्रिया चल रही है और ताकि जानकारों को अच्छा भोजन और सुविधाएं प्रदान कर सके। क्योंकि चिड़ियाघर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इसके साथ ही मैसूर चिड़ियाघर के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम में भी आप हिस्सा बन सकते हैं।  यहां पर आप अपने पसंदीदा जानवर को एक वर्ष या उससे कम अवधि के लिए गोद ले सकते हैं।