भोपाल। मध्य  प्रदेश में कांग्रेस के दो दिग्गजों के बीच विवाद  थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच मयान से तलवारें निकल गई हैं। जहां  सिंधिया ने शिक्षकों और किसानों के मुद्दों पर सड़क पर उतरने का ऐलान किया तो कमलनाथ ने इसका करारा जवाब देते हुए कहा कि घोषणा पक्ष पांच महीने के लिए नहीं बल्कि पांच साल के लिए होता है। हालांकि एक बार फिर दोनों दिग्गजों के बीच चली आ रही लड़ाई दस जनपथ तक पहुंच गई है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दो गुट एक बार फिर आमने सामने हैं। एक दिन पहले ही कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि अग राज्य सरकार जनता से किए वादे पूरे नहीं करती है तो वह जनता के पक्ष में सड़कों पर उतरेंगे। हालांकि सिंधिया और कमलनाथ की दुश्मनी जगजाहिर है और दोनों एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते रहते हैं।

हालांकि पिछले कुछ दिनों से सिंधिया राज्य में ज्यादा सक्रिए हुए हैं। क्योंकि पिछले दिनों उनकी मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हुई थी जिसके बाद ये माना जा रहा था कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है। जिसके बाद उन्होंने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी और कार्यकर्ताओं से मिलना शुरू कर दिया था। जो कमलनाथ गुट को अखर रही थी।

वहीं अब सिंधिया ने शिक्षकों के समर्थन में अपनी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का ऐलान कर राज्य सरकार को सकते में डाल दिया है। क्योंकि सरकार कांग्रेस की है। जिसको लेकर विपक्ष को सरकार की विफलता का बड़ा मुद्दा मिल गया है। ऐसा  नहीं है कि वह कमलनाथ सरकार के खिलाफ पहली बार बयान दे रहे हैं। जबकि इससे पहले वह कई बार कमलनाथ सरकार को घेर चुके हैं। इसी बीच कमलनाथ ने दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की।

इस बैठक में राज्य में कांग्रेस के नेताओं द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ की जा रही बयान बाजी के लिए भी कमलनाथ से सोनिया  गांधी से बातचीत की। गौरतलब है कि सिंधिया ने मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के अतिथि अध्यापकों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में अगर सरकार पार्टी के घोषणापत्र को पूरा लागू नहीं करती है तो वह राज्य कमलनाथ सरकार के  सड़कों पर उतरने में नहीं हिचकिचाएंगे।