पुलिस महानिदेशकों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना पुराना फैसला सुधारा

First Published 13, Mar 2019, 4:34 PM IST
Supreme court corrected his own decision on DGP Recruitment
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि जिन अधिकारियों का कार्यकाल 2 साल से कम बचा है उन्हें डीजीपी के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को सुधार लिया है। 

नई दिल्ली:  राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर दायर सुधार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुधार करते हुए कहा है कि राज्य में जिन पुलिस अधिकारियों का कार्यकाल 6 महीने या उससे अधिक बचा है उन्हें राज्य का डीजीपी नियुक्त कर सकती है। 

 सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में कहा था कि जिनका कार्यकाल दो साल से कम बचा है उन्हें डीजीपी नियुक्त नही किया जा सकता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया है। 

जनवरी में पांच राज्यों पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार सरकार ने डीजीपी के चयन एवं नियुक्ति के संबंध में स्थानीय कानूनों के क्रियान्वयन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि डीजीपी की नियुक्तियों के संबंध में पिछले निर्देश पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के लिए जनहित में दिया गया था। 

कोर्ट ने पिछले साल जुलाई में देश मे पुलिस सुधार को लेकर प्रकाश सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कई दिशानिर्देश और डीजीपी की नियुक्ति के संबंध में व्यवस्था दी थी। 

दरअसल पिछले साल कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह डीजीपी की नियुक्ति किए जा सकने वाले उम्मीदवारों के रूप में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम तीन महीने पहले केंद्रीय लोक सेवा आयोग को भेजेंगे। यूपीएससी इनमें से तीन अधिकारियों के नाम तय करेगा। राज्य उनमें से किसी एक को डीजीपी या पुलिस आयुक्त बनाएंगे। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि जिनका कार्यकाल बचे हो उन्ही अधिकारियों की डीजीपी के पद के लिए नियुक्ति होगी। 

कोर्ट ने यह भी कहा था कि ये सारे निर्देश साल 2006 में पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह की याचिका पर आए फैसले में संशोधन की मांग को लेकर दिए गए आवेदन के जवाब में दिए गए हैं। 

मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा था कि ज्यादातर राज्य सरकार रिटायर होने के कगार पर पहुचे अधिकारियों को कार्यकारी पुलिस महानिदेशक नियुक्त करते है। जिसपर कोर्ट ने कहा था कि कोई भी राज्य कार्यकारी पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति ना करे।
 

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