पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में आ रही दरार को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी आगे आई हैं। सोनिया ने सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है। ताकि विधानसभा चुनाव से पहले सबकुछ ठीक हो जाए और सहयोगी दल मिलकर चुनाव लड़ सकें। फिलहाल सहयोगी दलों की समन्वय समिति की मांग का विवाद पटना से निकल कर दिल्ली तक पहुंच गया है। अब इस विवाद को दूर करने का जिम्मा सोनिया गांधी ने अपने हाथों में लिया है और आज महागठबंधन के सभी घटक दलों की वर्चुअल बैठक बुलाई है।

 

असल में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी महागठबंधन में समन्वय समिति की मांग कर रहे हैं। वह लगातर राष्ट्रीय जनता दल और तेजस्वी यादव के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।  मांझी ने सहयोगी राजद पर मनमानी का आरोप लगाते हुए 25 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। मांझी ने कहाकि अगर इस दौरान महागठबंधन में समन्वय समिति नहीं बनती है तो वह अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होगा। हम ने लोकसभा का चुनाव महागठबंधन में रहकर लड़ा था। लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए मांझी राजद और कांग्रेस पर दबाव बना रहे हैं।

हालांकि मांझी विवाद को सुलझाने के लिए  दिल्ली पहुंचे हैं और उनकी कांग्रेस के रणनीतिकार अहमद पटेल के साथ बैठक भी हुई है। माना जा रहा है कि आज उनकी सोनिया गांधी से मुलाकात हो सकती है। बताया जा रहा है कि मांझी की मुलाकात मंगलवार को सोनिया गांधी से नहीं हो पाई और वह पटेल से मिले। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मांझी ने पटेल को राज्य के राजनीतिक हालातों की जानकारी दी और राजद और तेजस्वी की मनमानी की शिकायत की। वहीं आज सोनिया गांधी की अध्यक्षता में महागठबंधन के सभी सहयोगी दलों की वर्चुअल बैठक हो सकती है। 

नीतीश कुमार के संपर्क में भी हैं मांझी

जीनत राम मांझी भले ही दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात कर रहे हों। लेकिन सच्चाई ये है कि वह लगातार राज्य के सीएम नीतीश कुमार के संपर्क में हैं और राज्य में चर्चा है कि राज्य के हालत को देखते हुए मांझी अपनी पार्टी का विलय कभी भी जदयू में करा सकते हैं।