Gold investment: जेवर बनवाने से लेकर कारोबारी धंधे तक के लिए लोग सोना खरीदते हैं। गोल्ड खरीदना और उसके जेवर पहनना हमारे भारतीय परंपरा के लिए शानो-शौकत के साथ रहीशी की भी निशानी मानी जाती है। इस कीमती धातू के लूट और छिनैती होने का भी बहुत खतरा रहता है। ये खबर गोल्ड खरीदने और गोल्ड के जेवर पहनने वालों के लिए बहुत ही काम की है, जिसके बारे में 99 फीसदी लोगों को कोई जानकारी ही नहीं है। 

Gold Insurance: कहां-कहां मिल रह है सोना खरीद पर इंश्योरेंस
आपको जानकर ये हैरानी होगी कि जब आप किसी ब्रांडेड शॉप से गोल्ड खरीदते हैं तो आपको उसके साथ उस गोल्ड का इंश्योरेंस भी मिलता है, जो बिल्कुल फ्री हाेता है। परंतु अफसोस की ज्यादातर लोगों को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं होती है। कल्याण ज्वैलर्स, सेन्को गोल्ड एंड डायमंड, मालाबार गोल्ड जैसी बड़ी कंपनियों से गोल्ड खरीदने पर इंश्योरेंस निश्चित मिलता है। अब तो बड़े ब्रांड वाले ज्वैलरी शॉप वाले ही नहीं छोटे ज्वैलर भी गोल्ड इंश्योरेंस ऑफर करने लगे हैं।

Gold Insurance: कंपनियां क्यों कराती हैं इंश्योरेंस?
अब आपके मन में यह सवाल उठेगा कि आखिर बेचने के बाद कंपनियां क्यो आपके नुकसान की भरपाई करेंगी, तो इसका जवाब यह है कि सोना खरीदते वक्त कंपनिया पूरे सोने का ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी 1 ईयर भी खरीदती हैं। जिसका मकसद प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ लूट-छिनैती घटनाओं को कवरअप मिल सके। हालांकि हर कंपनी के पास गोल्ड पर एक जैसी इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं होती। सोना खरीदते वक्त आप शॉप पर इंश्योरेंस और उसकी समयवधि के बारे में पूछ सकते हैं। इंश्योरेस पॉलिसी के खत्म होने के बाद इसे रेन्यू भी कराया जा सकता है। जैसे प्रॉपर्टी और लाइफ इंश्योरेंस होते हैं, सोने या अन्य गहनों के लिए भी ऐसी ही पॉलिसी होती है।

Gold Insurance: किन घटनाओं में नहीं मिलता कवरअप
गौर करने वाली बात यह है कि इस गोल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ चीजें कवरअप नहीं करती हैं। ज्वैलरी गुम हो जाने पर कवर नहीं मिलता। इसकी वजह यह है कि इंश्योरेंस कंपनी इसे बीमाधारक की भूमिका को संदिग्ध मानती है। अगर आपने FIR लिखाया है और उसकी कापी आपके पास है तो आप इंश्योरेंस कंपनी पर दावा ठोक सकते हैं, लेकिन इसमें गुम जेवर का पूरा पैसा नहीं मिलता है। कंपनी ज्वैलरी की कीमत में मेकिंग चार्जेज और टैक्स काटती है।

Gold Insurance: कैसे करें क्लेम दावा?

  • सराफा कारोबारी अमूमत ग्राहकों को इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी या क्लेम फाइल के बारे में बताने से बचते है।
  • क्लेम के लिए ज्वैलर्स अपनी वेबसाइट पर एक ऐप या कंसल्टेंसी का नाम दे सकते हैं।
  • यदि कोई जानकारी नहीं दी जाती है, तो ज्वैलर से मास्टर पॉलिसी नंबर और बीमा कंपनी का नाम पूछना चाहिए।
  • इसमें यदि कोई एजेंसी या एजेंट शामिल नहीं है, तो आप सीधे बीमाकर्ता से संपर्क कर सकते हैं।
  • दावा दायर करने के लिए आपको पुलिस रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शी अकाउंट्स, और अन्य डाक्यूमेंटों को क्लेम फॉर्म के साथ अटैच  करें। 

 


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