ट्रेवल डेस्क। हैदराबाद का नाम लेते ही दो चीज़ें सामने आ जाती हैं, एक हैदराबादी बिरयानी और दूसरा चारमीनार। घूमने के लिए हैदराबाद में कई नायाब और खूबसूरत जगह है। अपने ऐतिहासिक इमारत के साथ-साथ हैदराबाद अपने खाने के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है। इस शहर में मौजूद महल मकबरे और मस्जिदों को एक्सप्लोर करने के लिए पूरी दुनिया भर से टूरिस्ट यहां आते हैं। वैसे तो हैदराबाद में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक सुंदर जगह है लेकिन हम आपको हैदराबाद की चार जगह के बारे में बताएंगे जो शहर के सिग्नेचर पॉइंट का जाते हैं।
चारमीनार का इतिहास 450 साल पुराना है। अगर आप हैदराबाद गए हैं और अपने चारमीनार नहीं देखा तो आप का टूर अधूरा है। जैसा कि नाम से पता चल रहा है चारमीनार तो बता दें की इस इमारत में चार मीनार हैं। कहां जाता है की चारमीनार के अंदर एक अंडरग्राउंड सुरंग है जो गोलकुंडा फोर्ट को चारमीनार से जोड़ने का काम करती है। चारमीनार अपनी खूबसूरती के कारण हमेशा पर्यटकों से घिरा रहता है। अगर आप घूमने के साथ-साथ शॉपिंग भी करना चाहते हैं तो चारमीनार के इर्द-गिर्दतमाम बाजार है जहां से आप सामान भी खरीद सकते हैं।
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गोल्कोंडा फोर्ट
गोल्कोंडा फोर्ट हैदराबाद की ऐतिहासिक धरोहर है और देश के महत्वपूर्ण टूरिस्ट स्पॉट में से एक है। गोल्कोंडा फोर्ट कुतुब शाही और निजाम का घर हुआ करता था जहां उन्होंने 400 साल से ज्यादा दिनों तक राज किया। यह किला अपनी वास्तुकला के कारण भी मशहूर है। इसमें देखने के लिए कुतुब शाही मकबरे, आलमगीर मस्जिद, बादशाह महल वगैरह है। किले को देखने के लिए पूरे साल पर्यटक आते रहते हैं।
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रामोजी फिल्म सिटी
रामोजी फिल्म सिटी एक बेहतरीन जगह है और हैदराबाद की शानदार टूरिस्ट प्लेस में से एक है। यह फिल्म सिटी 2500 एकड़ में फैली हुई है और इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो के रूप में दर्ज किया गया है। यहां लंदन स्ट्रीट, जैपनीज गार्डन, एयरपोर्ट, हॉस्पिटल, लैंडस्केप और लैबोरेट्री समेत कई शूटिंग लोकेशन है। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो यहां आपको स्पोर्ट्स और टॉय ट्रेन की सवारी कभी आनंद मिल सकता है। इसके अलावा कई गार्डन और रेस्टोरेंट भी है जहां आप लजीज किस्म के व्यंजन का भी जायका ले सकते हैं।
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मक्का मस्जिद
मक्का मस्जिद हैदराबाद की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिदों में से एक है। मक्का मस्जिद का निर्माण 1614 में मुहम्मद कुली कुतुब शाह के शासनकाल में शुरू हुआ था और 1694 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पूरा किया था। इस मस्जिद को बनने में पूरे 77 साल लगे थे। इस मस्जिद का नाम मक्का मस्जिद इसलिए है क्योंकि मस्जिद में जो ईंट इस्तेमाल हुई है वह मक्का शहर से लाई गई थी। मक्का मस्जिद की स्थापत्य शैली इंडो इस्लामिक तरीके से बनी है और इसे कुतुबशाही का सबसे बेहतरीन वास्तु शिल्प माना जाता है।
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