कौन थे फली एस नरीमन? जो कई बड़े केस का रहे हिस्सा, इमरजेंसी के विरोध में इस्तीफा तक...जानिए उनकी खास बातें

Rajkumar Upadhyaya |  
Published : Feb 21, 2024, 11:35 AM IST
कौन थे फली एस नरीमन? जो कई बड़े केस का रहे हिस्सा, इमरजेंसी के विरोध में इस्तीफा तक...जानिए उनकी खास बातें

सार

सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील फली एस नरीमन (Fali Sam Nariman) का 21 फरवरी को देहांत (Fali S Nariman Death) हो गया। वह 95 साल के थे। आइए जानते हैं उनकी खास बातें। 

Fali S Nariman Passed Away: सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील फली एस नरीमन (Fali Sam Nariman) का 21 फरवरी को देहांत (Fali S Nariman Death) हो गया। वह 95 साल के थे। चाहे इंदिरा गांधी सरकार (Indira Gandhi Government) के इमजरेंसी लागू करने के फैसले की बात हो या फिर कुछ खास मामले। नरीमन के उठाए गए कदम और विरोध इतिहास की तारीखों में दर्ज हो गए। आइए जानते हैं कौन थे फली एस नरीमन?

70 साल तक वकालत

फली सैम नरीमन का जन्म 10 जनवरी 1929 को रंगून में पारसी माता-पिता सैम बरियामजी नरीमन और बानो नरीमन के घर हुआ था। स्कूली शिक्षा विशप कॉटन स्कूल शिमला से पूरी की और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी किया। शुरुआती दिनों में पिता चाहते थे कि बेटा फली सैम नरीमन सिविल सर्विस एग्जाम में शामिल हो। पर  उस समय वह उसका खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं थे। कहा जाता है कि इसी वजह से उन्होंने वकालत को अपना पेशा चुना और 70 साल तक इसी पेशे का हिस्सा रहें।

1950 में बॉम्बे हाईकोर्ट से शुरु की वकालत

बॉम्बे हाईकोर्ट से साल 1950 में वकालत शुरु करने वाले फली एस नरीमन साल 1961 में सीनियर एडवोकेट नामित हुए। साल 1971 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत का काम शुरु किया। फिर देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General) बने। साल 1991 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किए गए। वह भारत के उन संवैधानिक वकीलों में से हैं, जिन्होंने कई प्रमुख मामलों में पैरवी की।

इंदिरा सरकार ने आपातकाल घोषित किया तो छोड़ा पद

फली एस नरीमन ने मई 1972 से 25 जून 1975 तक भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम किया। पर साल 1975 में इंदिरा गांधी सरकार के इमरजेंसी लागू करने के फैसले से खुश नहीं थे। इसी वजह से 26 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा के बाद रिजाइन कर दिया। सीनियर एडवोकेट रह चुके उनके बेटे रोहिंटन नरीमन सुप्रीम कोर्ट के जज थे।

गुजरात सरकार की तरफ से केस लड़ने से इंकार

साल 1999 में भी ऐसा ही एक वाकया हुआ। नर्मदा मामले में गुजरात सरकार के वकील नरीमन को पता चला कि राज्य में ईसाइयों पर लगातार हमले हो रह हैं तो उन्होंने इसकी निंदा की और गुजरात सरकार की तरफ से केस लड़ने से इंकार कर दिया।

हॉर्स ट्रेडिंग शब्द में घोड़ों का अपमान

सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने नरीमन के निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि वह इतिहास के गूढ़ रहस्य खोज निकालते थे। फली एस नरीमन को याद करते हुए सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में सिंघवी लिखते हैं कि उन्होंने कहा था कि इंसानों की गलती के लिए हॉर्स ट्रेडिंग शब्द का इस्तेमाल घोड़ों का अपमान है। आखिर घोड़े वफादार जानवर होते हैं।

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