पीके से क्यों नाराज हैं 'सुशासन बाबू', बनेंगे बागी या फिर होंगे शहीद

Published : Jan 29, 2020, 06:53 AM IST
पीके से क्यों नाराज हैं 'सुशासन बाबू', बनेंगे बागी या फिर होंगे शहीद

सार

पीके कभी नीतीश कुमार के करीबी लोगों में शुमार थे। लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने और फिर नागरिकता कानून को लेकर वह पार्टी के भीतर बागी  की तरह बयान देने लगे। हालांकि उससे पहले पीके की पश्चिम बंगाल के सीएम ममता बनर्जी की दूरी भी पार्टी को खटने लगी। क्योंकि पार्टी के एक धड़े को लगने लगा कि पीके पार्टी के पद को भुना  रहे हैं।

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके करीबी रणनीतिकार और पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि जिसे पार्टी से बाहर जाना है तो जाए। वहीं नीतीश कुमार ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पीके को पार्टी में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर लिया गया था। जिसके बाद पीके ने नीतीश कुमार को कड़ा जवाब दिया है। लेकिन इन दोनों नेताओं के बीच उपजे विवाद के बाद साफ हो गया है कि प्रशांत किशोर अब ज्यादा दिनों तक पार्टी में नहीं रहेंगे। या तो पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी या फिर पीके खुद पार्टी को अलविदा कहेंगे।

पीके कभी नीतीश कुमार के करीबी लोगों में शुमार थे। लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने और फिर नागरिकता कानून को लेकर वह पार्टी के भीतर बागी  की तरह बयान देने लगे। हालांकि उससे पहले पीके की पश्चिम बंगाल के सीएम ममता बनर्जी की दूरी भी पार्टी को खटने लगी। क्योंकि पार्टी के एक धड़े को लगने लगा कि पीके पार्टी के पद को भुना  रहे हैं। वहीं पीके दिल्ली में आम आदमी पार्टी के भी चुनावी प्रचारक बने। हालांकि नीतीश कुमार ने कुछ महीनों पहले कहा था कि पीके के निजी मामलों का पार्टी के साथ कुछ भी लेना देना नहीं है। 

लेकिन नागरिकता कानून को लेकर आए पीके  के बयान के बाद नीतीश को लगने लगा कि प्रशांत किशोर खुद को स्थापित करने लगे। पीके कभी कांग्रेस को सलाह दे रहे थे तो कभी अपनी ही  पार्टी के खिलाफ बयान दे रहे थे। वहीं माना जा रहा था कि पीके के बयान  एक तरह के ममता बनर्जी के बयान हैं।  जबकि नागरिकता कानून को लेकर नीतीश कुमार ने जो स्टैंड लिया था वह पूरी पार्टी का था। लिहाजा नीतीश कुमार का कहना था कि अगर किसी को दिक्कत है तो वह इस तरह के मामले पार्टी फोरम पर उठाए।

लेकिन पीके को लग रहा था कि वह नागरिकता कानून को लेकर  राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित कर लेंगे। हालांकि बाद में कांग्रेस ने भी पीके पर तंज कसा था। पीके ने कांग्रेस को सलाह दी थी उसे नागरिकता कानून को बड़े स्तर पर उठाना चाहिए। इस बात को लेकर नीतीश कुमार नाराज बताए जाते हैं। हालांकि पीके के विरोधी भी नीतीश कुमार को समझाने में सफल रहे कि पीके अपने बलबूते दस वर्कर नहीं बना सकते हैं।

लेकिन इसके बावजूद वह पार्टी की साख को अपने बयानों से नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके बयान विपक्षी दलों को फायदा पहुंचा रहे हैं। लिहाजा नीतीश कुमार ने दो टूक में कह दिया कि अगर उन्हें पार्टी के बाहर जाना है तो जाए। वहीं पीके ने भी नीतीश कुमार पर हमला बोला है और माना जा रहा है कि अब पीके और नीतीश के बीच ये लड़ाई खत्म होगी।
 

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